कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का चुनावी पारा चढ़ने के साथ ही उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस चरण में चुनावी मैदान में उतरे लगभग 23% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं 22% उम्मीदवार करोड़पति क्लब का हिस्सा हैं।
अपराध का साया: 142 में से 63 सीटें 'रेड अलर्ट' पर
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे चरण के कुल 1,445 उम्मीदवारों के हलफनामों के विश्लेषण से पता चला है कि लोकतंत्र के इस उत्सव में 'बाहुबल' का प्रभाव कम नहीं हुआ है।
गंभीर अपराध: 338 (23%) उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जिनमें से 20% (295 उम्मीदवार) गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं।
हत्या के आरोप: 16 उम्मीदवारों पर हत्या और 80 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।
रेड अलर्ट सीटें: राज्य की 142 निर्वाचन क्षेत्रों में से 63 (44%) को 'रेड अलर्ट' सूची में रखा गया है। ये वे सीटें हैं जहाँ तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड है।
पार्टीवार विश्लेषण: किस दल में कितने 'दागी'?
दागी उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में प्रमुख राजनीतिक दलों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| राजनीतिक दल | कुल उम्मीदवार (विश्लेषित) | आपराधिक मामले वाले उम्मीदवार (%) |
|---|---|---|
| BJP | 141 | 72% (102 उम्मीदवार) |
| CPI(M) | 100 | 51% (51 उम्मीदवार) |
| TMC | 142 | 35% (49 उम्मीदवार) |
| Congress | 142 | 26% (37 उम्मीदवार) |
Export to Sheets
धनबल का दबदबा: TMC के 73% प्रत्याशी करोड़पति
राजनीति में अमीरी का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। इस चरण में प्रति उम्मीदवार औसत संपत्ति ₹1.21 करोड़ आंकी गई है। कुल 1,445 उम्मीदवारों में से 321 (22%) के पास एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है।
TMC: करोड़पति उम्मीदवारों की सूची में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस सबसे आगे है, जिसके 73% (103) उम्मीदवार करोड़पति हैं।
BJP: भाजपा के 52% (73) उम्मीदवार इस श्रेणी में आते हैं।
वामपंथ और कांग्रेस: माकपा (CPI-M) के 33% और कांग्रेस के 25% उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ से अधिक घोषित की है।
विशेषज्ञों की राय: ADR की यह रिपोर्ट मतदाताओं को आगाह करती है कि वे अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों की शैक्षिक, वित्तीय और आपराधिक पृष्ठभूमि को जानकर ही मतदान करें। बंगाल के इस चुनावी महासमर में धनबल और बाहुबल की यह जुगलबंदी लोकतंत्र के भविष्य के लिए एक गंभीर चर्चा का विषय है।