चंडीगढ़: पंजाब की सियासत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपनी ही सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अविश्वास जताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। दुष्कर्म और अवैध माइनिंग जैसे गंभीर आरोपों में घिरे विधायक ने आशंका जताई है कि उन्हें नए फर्जी मामलों में फंसाकर लगातार जेल में रखने की साजिश रची जा रही है।
सरकार से मांगा जवाब, हाईकोर्ट ने थमाया नोटिस
विधायक पठानमाजरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मामला माना है। अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए इन संगीन आरोपों पर राज्य का क्या पक्ष है।
क्या है विधायक की मुख्य मांग?
फिलहाल हिरासत में चल रहे पठानमाजरा के वकील दीपिंदर सिंह विर्क ने अदालत में दलील दी कि विधायक के खिलाफ पहले से ही दो एफआईआर दर्ज हैं। विधायक को डर है कि:
यदि उन्हें मौजूदा मामलों में जमानत मिल जाती है, तो पुलिस तुरंत किसी नए मामले में गिरफ्तार कर सकती है।
उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।
उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन न हो।
"याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि यदि भविष्य में उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज किया जाता है, तो गिरफ्तारी से पहले उन्हें कम से कम सात दिन का अग्रिम नोटिस दिया जाए। ताकि उन्हें कानूनी उपाय अपनाने का उचित अवसर मिल सके।"
"मौलिक अधिकारों का उल्लंघन"
पठानमाजरा ने अपनी याचिका में सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जो उनके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता के गलियारों में उनके खिलाफ रची जा रही साजिशों के कारण उनके लिए निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कम होती जा रही है।
हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप और सरकार से जवाब मांगे जाने के बाद, अब सबकी नजरें पंजाब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या विधायक को सात दिन के नोटिस की राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी, यह सरकार के जवाब के बाद ही साफ होगा।