बंगाल चुनाव: पहले चरण में रिकॉर्ड 92.89% मतदान; क्या 'वोटर लिस्ट' की छंटनी ने बदल दिया जीत का गणित?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92.89 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है, जो साल 2021 के चुनाव के मुकाबले 10.5% अधिक है। 2021 के चुनाव में टीएमसी और भाजपा के बीच जीत का अंतर लगभग 9.87% वोटों का था। दिलचस्प बात यह है कि इस बार जो 90.8 लाख नाम हटाए गए हैं, वह संख्या टीएमसी की पिछली जीत के अंतर से थोड़ी अधिक है।

24 Apr 2026  |  2

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92.89 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है, जो साल 2021 के चुनाव के मुकाबले 10.5% अधिक है। हालांकि, इस भारी मतदान प्रतिशत के पीछे एक तकनीकी और राजनीतिक पेंच भी सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से 90.8 लाख नामों को हटाए जाने के कारण 'वोटर बेस' छोटा हो गया है, जिससे मतदान का प्रतिशत बढ़ा हुआ नजर आ रहा है।

मतदाता सूची का 'विशेष पुनरीक्षण' और बदला हुआ गणित

चुनाव आयोग के आदेश पर कराए गए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट और अवैध मतदाताओं के नाम हटाना था। इस प्रक्रिया में करीब 12 प्रतिशत (90.8 लाख) मतदाताओं के नाम काट दिए गए, जिससे कुल मतदाता आधार घटकर 6.75 करोड़ रह गया।

आंकड़ों की बाजीगरी:

SIR के बाद मतदाता: 3.61 करोड़ (पहले चरण के लिए)

कुल वोट पड़े: 3.35 करोड़

परिणाम: मतदान प्रतिशत उछलकर 92.8% तक पहुँच गया।

राजनीतिक घमासान: 'सत्ता परिवर्तन' बनाम 'भेदभाव'

इस बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

भाजपा का पक्ष: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे 'सत्ता परिवर्तन' का संकेत बताते हुए कहा कि तृणमूल के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का सूरज डूब गया है।

टीएमसी का आरोप: सत्ताधारी दल का आरोप है कि पुनरीक्षण के बहाने मुस्लिम बहुल इलाकों में जान-बूझकर मतदाताओं के नाम काटे गए हैं ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके।

प्रमुख जिलों और सीटों पर प्रभाव

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सबसे ज्यादा असर उन जिलों में देखा गया है जहाँ 2021 में टीएमसी का दबदबा था:

मुर्शिदाबाद, मालदा, 24 परगना: इन चार जिलों में ही लगभग 12.2 लाख नाम काटे गए हैं।

बीजेपी की सीटें: कूचबिहार की दिनहाटा (10,000+ नाम कटे), पुरुलिया की बलरामपुर और मयना सीट पर भी बड़ी संख्या में मतदाताओं की छंटनी हुई है।

नतीजों पर क्या होगा असर?

2021 के चुनाव में टीएमसी और भाजपा के बीच जीत का अंतर लगभग 9.87% वोटों का था। दिलचस्प बात यह है कि इस बार जो 90.8 लाख नाम हटाए गए हैं, वह संख्या टीएमसी की पिछली जीत के अंतर से थोड़ी अधिक है।

विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनाव का नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि किस समुदाय और किस क्षेत्र में कितने नाम कटे हैं। चूंकि टीएमसी ने 2021 में जीती अपनी 82.7% सीटों पर वोटर लिस्ट में कटौती का सामना किया है (विशेषकर पश्चिम बर्दवान और दक्षिण दिनाजपुर जैसी कम अंतर वाली सीटें), इसलिए मुकाबला बेहद अनिश्चित हो गया है। यह कटौती दोनों ही दलों के समीकरणों को बिगाड़ सकती है।

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