पश्चिम बंगाल की असली ताकत छिपी है 'माछ-भात' और 'मीट' की इकोनॉमी में , राज्य की GDP में देता है इतना योगदान

पश्चिम बंगाल की चर्चा अक्सर राजनीति और कला के इर्द-गिर्द सिमट जाती है, लेकिन राज्य की असली ताकत इसके 'माछ-भात' और 'मीट' की इकोनॉमी में छिपी है। यह सेक्टर न केवल राज्य की जीडीपी (GSDP) का अहम हिस्सा है, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोजगार का मुख्य जरिया भी है।

24 Apr 2026  |  2

1. GSDP में योगदान और रोजगार का बड़ा आधार

मछली पालन बंगाल के आर्थिक ढांचे की रीढ़ है। आंकड़ों के अनुसार:

GSDP में हिस्सा: साल 2011-12 में राज्य की अर्थव्यवस्था में इसका योगदान 3.3% था, जो 2022-23 में 2.1% रहा। गिरावट के बावजूद अन्य राज्यों की तुलना में यह आंकड़ा काफी प्रभावशाली है।

रोजगार: यह सेक्टर करीब 32 लाख लोगों की आजीविका का आधार है। 2019-20 के डेटा के मुताबिक, राज्य की 3.25% आबादी सीधे तौर पर फिशिंग बिजनेस से जुड़ी है, जो देश में सर्वाधिक है।

2. मांस उत्पादन में 'नंबर 1' राज्य

हैरान करने वाली बात यह है कि पश्चिम बंगाल देश का सबसे बड़ा मांस उत्पादक राज्य बनकर उभरा है।

उत्पादन: 'बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिस्टिक्स 2025' के अनुसार, देश के कुल मांस उत्पादन का 12.46% हिस्सा अकेले बंगाल से आता है।

प्रतिद्वंद्वी: इस मामले में बंगाल ने उत्तर प्रदेश (12.2%) और महाराष्ट्र (11.57%) जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

3. मछली उत्पादन और एक्सपोर्ट का हब

बंगाल की भौगोलिक स्थिति (158 किमी लंबी तटरेखा और 2,526 किमी लंबी नदियां/नहरें) इसे मत्स्य पालन के लिए स्वर्ग बनाती है।

इनलैंड मछली: अंतर्देशीय (Inland) मछली उत्पादन में बंगाल देश में पहले स्थान पर है।

मछली के बीज: देश के कुल मछली बीज उत्पादन में राज्य का 16% से ज्यादा का योगदान है।

एक्सपोर्ट: भारत का समुद्री भोजन एक्सपोर्ट 2024-25 में ₹62,408.45 करोड़ तक पहुँच गया है, जिसमें बंगाल की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण है। हालांकि, झींगा (Prawns) प्रोसेसिंग में सुधार से इसके और बढ़ने की संभावना है।

4. खपत का अनूठा रिकॉर्ड: 99% मांसाहारी आबादी

बंगाल में मांग और आपूर्ति का चक्र बेहद मजबूत है।

खपत: राज्य की लगभग 98-99% आबादी मांसाहारी है।

खर्च: घरों के कुल बजट का करीब 18.9% हिस्सा मछली और मांस पर खर्च होता है, जो पूरे भारत में सबसे ज्यादा है।

रेस्टोरेंट डिमांड: राज्य के रेस्टोरेंट्स में करीब 80% मांग मीट आधारित डिशेज की होती है।

5. त्योहारों में 'रिकॉर्ड तोड़' डिलीवरी

जहां देश के कई हिस्सों में नवरात्रि या त्योहारों पर नॉन-वेज की बिक्री कम हो जाती है, बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान यह चरम पर होती है।

स्विगी रिपोर्ट 2025: दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में प्रति मिनट 60 से ज्यादा ऑर्डर दर्ज किए गए।

पीक डिमांड: अष्टमी के दिन एक मिनट में सबसे ज्यादा 197 ऑर्डर आए।

पसंदीदा डिश: तीन दिनों के भीतर मटन और चिकन बिरयानी के 9,000 से ज्यादा ऑर्डर दिए गए।

निष्कर्ष

मछली पालन से लेकर क्लाउड किचन और एक्सपोर्ट तक, पश्चिम बंगाल की मांस-मछली इकोनॉमी एक विशाल नेटवर्क है। यह सेक्टर न केवल बंगाल की थाली को संपन्न बनाता है, बल्कि राज्य की वित्तीय रफ्तार को भी नई ऊर्जा दे रहा है। अगर कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स में निवेश बढ़ता है, तो भविष्य में यह 'माछ-भात इकोनॉमी' बंगाल के विकास का सबसे बड़ा इंजन साबित हो सकती है।

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