आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का भाजपा में विलय, सिद्धांतों से भटकाव का लगाया आरोप

पंजाब की राजनीति और आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए शुक्रवार का दिन एक बड़े सियासी भूचाल का गवाह बना। पार्टी के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 'आप' से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।

24 Apr 2026  |  2

 

नई दिल्ली/चंडीगढ़: पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। राघव चड्ढा अकेले नहीं, बल्कि 'आप' के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हो रहे हैं। यह कदम संवैधानिक प्रावधानों के तहत "विलय" (Merger) के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनकी सदस्यता पर भी आंच नहीं आएगी।

"गलत पार्टी में सही आदमी": चड्ढा का तीखा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा भावुक और हमलावर दोनों नजर आए। उन्होंने पार्टी छोड़ने की मुख्य वजहों का जिक्र करते हुए कहा:

सिद्धांतों से भटकाव: जिस पार्टी को खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के संकल्प से भटक गई है।

निजी लाभ: चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी अब राष्ट्रहित के बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है।

भ्रष्ट हाथों में कमान: "भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बनी पार्टी अब खुद भ्रष्ट और समझौतावादी व्यक्तियों के चंगुल में है।"

राघव चड्ढा का बयान: "पिछले कुछ वर्षों से मुझे लग रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूँ। जवानी के 15 साल देने के बाद आज बड़े दुख के साथ मैं जनता के करीब आने के लिए भाजपा का दामन थाम रहा हूँ।"

संवैधानिक प्रावधान और दो-तिहाई बहुमत

राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे प्रमुख चेहरे भी मंच पर मौजूद थे। चड्ढा ने स्पष्ट किया कि वे संविधान के उस नियम का पालन कर रहे हैं जिसके तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसद दूसरी पार्टी में मिलते हैं, तो उसे दलबदल कानून के तहत अयोग्य नहीं माना जाता।

कुल सांसद: 10

विलय करने वाले सांसद: 7 (जो दो-तिहाई से अधिक हैं)

सुरक्षा वापसी और उपनेता पद से हटाना: कलह की पृष्ठभूमि

यह बगावत अचानक नहीं हुई है। पिछले कुछ समय से 'आप' नेतृत्व और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ती दिख रही थीं:

2 अप्रैल: आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया था।

सुरक्षा की वापसी: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने उनकी पंजाब पुलिस वाली सुरक्षा वापस ले ली थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की।

पार्टी में उपेक्षा: इन कदमों को पार्टी के भीतर चड्ढा को हाशिए पर धकेलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा था।

चार्टर्ड अकाउंटेंट से राजनेता तक का सफर

राघव चड्ढा ने अपनी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) थे और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे। उनके साथ इस्तीफा देने वालों में क्रिकेटर, वैज्ञानिक, पद्म श्री पुरस्कार विजेता और शिक्षाविद शामिल हैं, जो पार्टी के शुरुआती दिनों के स्तंभ माने जाते थे।

भाजपा के लिए बड़ी जीत

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों का भाजपा में आना केंद्र सरकार के लिए ऊपरी सदन में अपनी ताकत बढ़ाने का एक बड़ा मौका है। विशेषकर पंजाब और दिल्ली की राजनीति में इसका दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है।

निष्कर्ष: राघव चड्ढा का जाना 'आप' के लिए केवल एक सांसद का जाना नहीं, बल्कि उसके वैचारिक और संगठनात्मक ढांचे के लिए एक बड़ा झटका है। दिल्ली और पंजाब में सत्तासीन पार्टी के लिए अपने संस्थापक सदस्यों और बुद्धिजीवी वर्ग को एक साथ खोना आने वाले चुनावों में बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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