चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और खरीद प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए 'ई-खरीद' प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सीधे नेतृत्व में उठाए गए इन कदमों का असर अब मंडियों में साफ दिखने लगा है, जहाँ तकनीक के इस्तेमाल से फर्जीवाड़े के रास्ते बंद हो गए हैं और सीधा लाभ वास्तविक किसानों तक पहुँच रहा है।
तकनीक का पहरा: सीसीटीवी और जीपीएस से निगरानी
खरीद प्रक्रिया को अभेद्य बनाने के लिए सरकार ने इस बार अत्याधुनिक संसाधनों का सहारा लिया है:
रियल-टाइम निगरानी: मंडियों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है।
जीपीएस ट्रैकिंग: फसलों के परिवहन में पारदर्शिता लाने के लिए वाहनों को जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे फसल के उठान से लेकर गोदाम तक पहुँचने की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
अनिवार्य पंजीकरण: खरीदारों (Buyers) का पंजीकरण अनिवार्य होने से अब हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित है, जिससे जवाबदेही तय हुई है।
एमएसपी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: किसानों की जेब में ज्यादा पैसा
मुख्यमंत्री स्वयं रोजाना की रिपोर्ट ले रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिले। इस सीजन में सरकार ने विभिन्न फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में सराहनीय वृद्धि की है:
| फसल | MSP (2026-27) | वृद्धि (पिछले वर्ष की तुलना में) |
|---|---|---|
| गेहूं | ₹2,585 प्रति क्विंटल | लगभग 6.59% (₹160 की बढ़ोतरी) |
| सरसों | ₹6,200 प्रति क्विंटल | -- |
| जौ | -- | ₹170 प्रति क्विंटल (लगभग 8.58%) |
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वर्तमान में राज्य की मंडियों में अब तक लगभग 60 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद की जा चुकी है।
बिचौलियों की भूमिका समाप्त, सत्यापन हुआ सख्त
नई व्यवस्था के तहत किसान पंजीकरण और फसल सत्यापन की प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी बनाया गया है। मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल के माध्यम से डेटा के मिलान ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल वही किसान अपनी उपज बेच पा रहे हैं, जिन्होंने वास्तव में फसल उगाई है। इससे 'कागजी खरीद' और बिचौलियों के जरिए होने वाले फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि इन सुधारों से न केवल सरकारी खजाने की बचत हो रही है, बल्कि हरियाणा का किसान भी अधिक सशक्त और डिजिटल रूप से साक्षर बन रहा है। प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक तीव्र कर सीधा लाभ किसानों के बैंक खातों में पहुँचाने की गति को और बढ़ाया जाएगा।