मोदी-ट्रंप 'महामिलन' की तैयारी: जून में फ्रांस के G7 शिखर सम्मेलन में होगी मुलाकात, मई में दिल्ली आएंगे मार्को रुबियो

जून 2026 में फ्रांस के एवियन में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता की प्रबल संभावना है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर पीएम मोदी 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। नों नेताओं की बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहेंगे।

25 Apr 2026  |  8

 

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्तों की गर्माहट एक बार फिर वैश्विक मंच पर दिखने वाली है। जून 2026 में फ्रांस के एवियन  में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता की प्रबल संभावना है। इस 'हाई-प्रोफाइल' बैठक की जमीन तैयार करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने यानी मई में नई दिल्ली का दौरा करेंगे।

फ्रांस में सजेगा कूटनीति का मंच

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर पीएम मोदी 15 से 17 जून तक आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

अहमियत: फरवरी 2025 में दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात के बाद यह पहला मौका होगा जब वे आमने-सामने बैठेंगे। हालांकि, दोनों के बीच फोन पर संवाद निरंतर जारी है।

रुबियो का 'मिशन दिल्ली': विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मई दौरे का मुख्य उद्देश्य मोदी-ट्रंप बैठक की रूपरेखा तय करना और क्वाड (Quad) व रक्षा समझौतों जैसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करना है।

तनाव और दोस्ती का अनूठा संतुलन

हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जहाँ एक ओर ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) और वीज़ा नियमों को लेकर तनाव रहा है, वहीं दूसरी ओर दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत मित्रता की केमिस्ट्री भी उतनी ही मजबूत है।

ट्रंप का बयान: 17 अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना 'सच्चा दोस्त' बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की थी।

रणनीतिक चिंताएँ: दोनों नेताओं की बातचीत में पश्चिम एशिया के हालात, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुखता से शामिल रहेंगे।

क्यों खास है यह मुलाकात?

द्विपक्षीय व्यापार: रुबियो के दौरे में एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) पर अंतिम मुहर लग सकती है, जिसकी आधारशिला फरवरी में रखी गई थी।

क्षेत्रीय सुरक्षा: ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया संघर्ष विराम के बाद पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

कम्युनिकेशन गैप: अमेरिकी प्रशासन भारत के साथ व्यापारिक मोर्चों पर व्याप्त दूरियों को पाटने और संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए उत्सुक है।

निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि जून की यह मुलाकात केवल एक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत-अमेरिका की 'स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' को फिर से परिभाषित करने का अवसर होगी। मार्को रुबियो का मई दौरा इस दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।

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