"किसान के बिना विकास असंभव": मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को 'किसान कल्याण वर्ष' समर्पित किया, मुआवजे और बोनस पर ऐतिहासिक निर्णय

'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस वर्ष को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में घोषित किया है और कृषि क्षेत्र में कई ऐतिहासिक सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की है। किसानों की मेहनत का सम्मान करते हुए सरकार ने गेहूं खरीदी के लक्ष्य में बड़ी बढ़ोतरी की है |

25 Apr 2026  |  3

 

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के अन्नदाताओं के नाम एक भावुक और संकल्पबद्ध संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार के लिए किसान केवल एक वर्ग नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास का आधार और परिवार का हिस्सा हैं। 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में घोषित किया है और कृषि क्षेत्र में कई ऐतिहासिक सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की है।

गेहूं उपार्जन में अभूतपूर्व वृद्धि और स्लॉट बुकिंग

किसानों की मेहनत का सम्मान करते हुए सरकार ने गेहूं खरीदी के लक्ष्य में बड़ी बढ़ोतरी की है:

लक्ष्य विस्तार: गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।

सुविधाजनक खरीदी: अब किसान सप्ताह में 6 दिन अपनी फसल बेच सकेंगे (शनिवार को भी खरीदी जारी रहेगी)।

स्लॉट बुकिंग: बुकिंग की समय सीमा को 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया है, ताकि हर किसान को अपनी उपज बेचने का पर्याप्त समय मिले।

ऐतिहासिक निर्णय: 4 गुना मुआवजा और फसलों पर बोनस

मुख्यमंत्री ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए कई क्रांतिकारी घोषणाएं की हैं:

भू-अर्जन मुआवजा: अब किसानों को उनकी भूमि के बदले बाजार मूल्य से 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा।

उड़द पर बोनस: दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तय समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल की बोनस राशि दी जाएगी।

सरसों और सोयाबीन: सरसों पर भावांतर योजना लागू होने से किसानों को बाजार में एमएसपी से भी अधिक दाम मिल रहे हैं।

ऊर्जा और सिंचाई: आत्मनिर्भर बनेगा किसान

बिजली और सिंचाई के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है:

सोलर पंप: 'कृषक मित्र योजना' के तहत 90% सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं, जिससे किसान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे।

सस्ती बिजली: देश में पहली बार केवल 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

दिन में सिंचाई: सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को रात के बजाए दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।

श्वेत क्रांति: 'मिल्क कैपिटल' बनेगा मध्यप्रदेश

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने विशेष प्रयास किए हैं:

नई समितियां: 1,752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है।

रिकॉर्ड संकलन: प्रतिदिन का दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम के पार पहुँच गया है।

भुगतान: दूध उत्पादक किसानों को अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

उर्वरक उपलब्धता और तकनीक का समावेश

वैश्विक स्तर पर युद्ध की स्थितियों के बावजूद, मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है:

यूरिया का भंडारण: इस साल 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष से भी अधिक है।

स्मार्ट वितरण: अब बिना लंबी लाइनों के, तकनीक के माध्यम से किसान मनचाहे स्थान से खाद प्राप्त कर सकेंगे।

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, "सच्चा वादा और पक्का काम" ही उनकी सरकार का मूल मंत्र है। जब खेतों से लेकर कारखानों तक समृद्धि आएगी, तभी मध्यप्रदेश और देश का किसान खुशहाल होगा। इन सुधारों के साथ मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में एक नए युग की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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