ICU सेवाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: 3 हफ्तों में कार्ययोजना तैयार करें सभी राज्य, 18 मई को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गहन चिकित्सा इकाइयों (ICU) के लिए कड़े और समान दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जीवन रक्षा के लिए ICU सेवाओं का मानक पूरे देश में एक जैसा और उच्च स्तरीय होना चाहिए।

25 Apr 2026  |  6

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन शामिल हैं, ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ICU सेवाओं में सुधार के लिए एक व्यावहारिक और यथार्थवादी (Realistic) कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता पर चिंता जताते हुए कहा कि ICU के लिए न्यूनतम आवश्यक मानकों का पालन हर हाल में होना चाहिए।

5 बुनियादी जरूरतों पर रहेगा फोकस

अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि कार्ययोजना तैयार करते समय शुरुआती चरण में इन 5 क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए:

मानव संसाधन: पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की उपलब्धता।

प्रशिक्षित स्टाफ: विशेष रूप से ICU प्रबंधन के लिए ट्रेंड कर्मी।

उपकरण: आधुनिक और चालू हालत में वेंटिलेटर व अन्य मशीनें।

लॉजिस्टिक्स: दवाओं और जरूरी चिकित्सा सामग्री की निर्बाध आपूर्ति।

ढांचागत सुविधाएं: अस्पताल में ICU के लिए तय मानक के अनुसार स्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर।

समय-सीमा और जवाबदेही (Timeline)

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सख्त समय-सीमा तय की है:

एक सप्ताह के भीतर: राज्यों के स्वास्थ्य सचिव विशेषज्ञों की पहली बैठक बुलाएं।

तीन सप्ताह के भीतर: ठोस कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार के स्वास्थ्य सचिव को रिपोर्ट भेजें।

मंत्रालय की भूमिका: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इन दिशानिर्देशों को एक 'एडवाइजरी' के रूप में जारी करेगा और अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा।

साझा मसौदा: केंद्र सरकार सभी राज्यों की रिपोर्ट साझा करेगी और एक संयुक्त बैठक कर अंतिम साझा ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

नर्सिंग स्टाफ के प्रशिक्षण पर विशेष जोर

अदालत ने एक बहुत ही व्यावहारिक सुझाव को स्वीकार करते हुए भारतीय नर्सिंग परिषद और पैरा मेडिकल परिषद को मामले में पक्षकार बनाया है।

तर्क: चूँकि नर्सें मरीजों के साथ 24 घंटे रहती हैं, इसलिए उन्हें ICU की गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण देना अनिवार्य है।

आदेश: इन संस्थाओं को अगली सुनवाई तक यह बताना होगा कि वे अपने पाठ्यक्रमों और ट्रेनिंग सिस्टम को ICU प्रबंधन के अनुकूल कैसे बनाएंगे।

अगली सुनवाई: 18 मई

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की प्रगति की समीक्षा 18 मई 2026 को करेगा। अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ICU सेवा केवल बड़े शहरों या महंगे अस्पतालों तक सीमित न रहे, बल्कि एक सामान्य मानक के तहत हर नागरिक को सुलभ हो।

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