नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी खुशखबरी दी है। वित्त मंत्रालय ने वेतन वृद्धि (Wage Revision) की सुस्त प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस बार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों को अपनी बढ़ी हुई पगार के लिए बरसों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
13वां द्विपक्षीय समझौता: 'तारीख पे तारीख' का खेल खत्म
आमतौर पर बैंक कर्मचारियों का वेतन समझौता तय समय सीमा से काफी देरी से पूरा होता था, जिससे एरियर और नियमों के बदलाव में उलझने पैदा होती थीं। लेकिन इस बार वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने 20 अप्रैल को सभी बैंक प्रमुखों को आदेश जारी कर नया रोडमैप तैयार किया है:
12 महीने की डेडलाइन: वेतन वृद्धि की पूरी बातचीत (Negotiation) को 12 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
तय समय पर लाभ: सरकार की मंशा है कि 1 नवंबर 2027 से लागू होने वाला 13वां द्विपक्षीय समझौता (Bipartite Settlement) बिना किसी लेटलतीफी के उसी तारीख से कर्मचारियों के खातों में पहुंचना शुरू हो जाए।
नियमों में बदलाव: मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सेटलमेंट के साथ-साथ उससे जुड़े नियमों में बदलाव की प्रक्रिया भी समय रहते पूरी कर ली जाए।
क्यों आसान हुई वेतन वृद्धि की राह?
इस बार वेतन बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा तर्क सरकारी बैंकों का ऐतिहासिक मुनाफा और उनकी मजबूत वित्तीय स्थिति है।
बैंकों का रिकॉर्ड मुनाफा (करोड़ रुपये में)
| वित्त वर्ष | कुल मुनाफा (करोड़ ₹) |
|---|---|
| FY 2023 | 1.05 लाख करोड़ |
| FY 2024 | 1.41 लाख करोड़ |
| FY 2025 | 1.78 लाख करोड़ |
बेहतर हुई आर्थिक सेहत:
NPA में गिरावट: सितंबर 2025 तक ग्रॉस एनपीए (NPA) गिरकर 2.30% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है।
मजबूत बैलेंस शीट: बैंकों का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 15.96% पर है, जो दर्शाता है कि बैंकों के पास अपने स्टाफ को बेहतर इंक्रीमेंट देने के लिए पर्याप्त फंड मौजूद है।
किसे मिलेगा इसका फायदा?
हर पांच साल में होने वाले इस वेतन संशोधन का लाभ केवल सरकारी बैंकों (PSB) तक ही सीमित नहीं है:
सरकारी बैंक: लाखों क्लर्क, अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी।
पुराने प्राइवेट बैंक: वे निजी बैंक जो IBA के वेतन समझौते का हिस्सा हैं।
विदेशी बैंक: भारत में कार्यरत कुछ चुनिंदा विदेशी बैंक भी इस समझौते के दायरे में आते हैं।
निष्कर्ष: सरकार का यह कदम न केवल बैंक कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाएगा, बल्कि बैंकिंग सेक्टर में कार्यकुशलता को भी नई ऊर्जा देगा। बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे का सीधा लाभ अब उन हाथों तक पहुंचेगा जो दिन-रात ग्राहकों की सेवा में जुटे रहते हैं।