रबर बाजार में ऐतिहासिक उछाल: कीमतें ₹260 के पार, युद्ध और मौसम ने बिगाड़ा गणित

पश्चिम एशिया में तनाव और भीषण गर्मी से रबर उत्पादन प्रभावित; कोट्टायम बाजार में रिकॉर्ड कीमतों से मचा हड़कंप।

08 May 2026  |  67

 

कोट्टायम | प्राकृतिक रबर के बाजार में इन दिनों जबरदस्त तेजी (Bullish trend) देखी जा रही है। घरेलू बाजार में रबर की कीमतें ₹253 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी हैं, जबकि कोट्टायम के स्थानीय बाजारों में कुछ सौदे ₹260 प्रति किलोग्राम तक होने की खबरें हैं। आपूर्ति में भारी कमी और बढ़ती मांग ने कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है।

कीमतों में आग लगने की मुख्य वजहें

'इंडियन रबर डीलर्स फेडरेशन' के अध्यक्ष जॉर्ज वैली के अनुसार, इस अचानक आई तेजी के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक और स्थानीय कारण हैं:

पश्चिम एशिया का तनाव: ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है।

भीषण गर्मी और सूखा: रबर उत्पादन क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान और बारिश की कमी के कारण उत्पादन स्तर में भारी गिरावट आई है।

कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी रबर की लागत पर असर डाला है।

वैश्विक बाजार के साथ तालमेल

बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में आई यह तेजी वैश्विक रुझानों के अनुरूप है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रबर की कीमतें वर्तमान में ₹288 प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में उत्पादन में आई बाधाओं और निरंतर औद्योगिक मांग ने वैश्विक स्तर पर कीमतों को सहारा दिया है।

क्या अब आएगी गिरावट?

राहत की बात यह है कि यह रैली लंबे समय तक नहीं टिक सकती। विशेषज्ञों का मानना है कि:

मौसम में बदलाव: केरल के रबर उत्पादक क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों में हुई गर्मियों की बारिश और मई के मध्य तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने की उम्मीद से उत्पादन में सुधार होगा।

नई टैपिंग: ऊँची कीमतों को देखते हुए किसानों ने उन क्षेत्रों में भी टैपिंग (दूध निकालना) शुरू कर दी है जो पहले खाली पड़े थे, जिससे बाजार में कच्चे माल की आवक बढ़ेगी।

किसानों की बढ़ी उम्मीदें

केरल में विधानसभा चुनाव के बाद संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) की सत्ता में वापसी से किसान समुदाय उत्साहित है। चुनाव घोषणापत्र में प्राकृतिक रबर के लिए ₹250 प्रति किलोग्राम का 'फ्लोर प्राइस' (न्यूनतम कीमत) घोषित किया गया था, जिससे किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है।

स्टॉक होल्डिंग पर चेतावनी: रिपोर्टों के अनुसार, कुछ किसान बढ़ती कीमतों के लालच में स्टॉक रोक कर रख रहे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि रबर को ज्यादा दिनों तक होल्ड करने से उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है, इसलिए जल्द ही बाजार में आपूर्ति सामान्य होने की संभावना है।

कुछ अन्य विकल्प (शीर्षक और कैचलाइन):

शीर्षक: रबर की कीमतों ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, ₹260 प्रति किलो तक पहुँचे दाम। कैचलाइन: अंतरराष्ट्रीय किल्लत और गर्मी की मार से रबर उत्पादकों की चांदी, उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी।

शीर्षक: मानसून की दस्तक और सरकार से आस, क्या थमेगी रबर की बढ़ती कीमतें? कैचलाइन: पश्चिम एशिया में शांति के संकेतों और बारिश से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद, बाजार में सुगबुगाहट तेज।

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