MGNREGA की जगह लेगा नया 'VB-G RAM G Act': अब 100 नहीं, साल में मिलेगा 125 दिन रोजगार

कैचलाइन: विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर ग्रामीण भारत का बड़ा कदम; 1 जुलाई से लागू होगा नया कानून।

11 May 2026  |  93

 

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। सोमवार को सरकार ने जानकारी दी कि बहुप्रतीक्षित ‘विकसित भारत गारंटी अधिनियम 2025’ (VB-G RAM G Act) आगामी 1 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। यह नया कानून दशकों पुराने 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (MGNREGA) का स्थान लेगा।

सरकार ने इसे ‘अगली पीढ़ी का ग्रामीण विकास ढांचा’ करार दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आजीविका को आधुनिक बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) से जोड़ना है।

क्या हैं नए कानून के मुख्य आकर्षण?

नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:

रोजगार की गारंटी बढ़ी: अब अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक परिवारों को साल में 100 के बजाय 125 दिनों के गारंटीड रोजगार का कानूनी अधिकार होगा।

नया फोकस एरिया: काम को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है—जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका इन्फ्रास्ट्रक्चर और खराब मौसम (Climate Change) के प्रभाव को कम करने वाले कार्य।

विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP): अब कार्यों का चयन रैंडम न होकर ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार की गई विशेष विकास योजनाओं के आधार पर होगा।

पुराना बनाम नया: क्या बदला और क्या नहीं?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि MGNREGA से नए कानून की ओर जाने का सफर 'निर्बाध' होगा।

विशेषताMGNREGA (पुराना)VB-G RAM G Act (नया)
गारंटीड दिन100 दिन प्रति वर्ष125 दिन प्रति वर्ष
हाजिरी का तरीकासामान्य मस्टर रोल/डिजिटलफेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान)
फंडिंग (सामान्य राज्य)सामग्री लागत पर 75:25 (केंद्र:राज्य)सामग्री लागत पर 60:40 (केंद्र:राज्य)
जॉब कार्डपुराना जॉब कार्डनया "ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड"

जो नहीं बदला: 15 दिनों के भीतर काम देने की अनिवार्यता, बेरोजगारी भत्ता, सीधे बैंक खाते में भुगतान (DBT) और मजदूरी में देरी पर मुआवजा देने जैसे प्रावधानों को बरकरार रखा गया है।

आधुनिक प्रशासनिक फीचर्स और चुनौतियां

नए कानून में तकनीक और स्थानीय जरूरतों का विशेष ख्याल रखा गया है:

फेस ऑथेंटिकेशन: फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब चेहरे की पहचान से हाजिरी लगेगी, हालांकि तकनीकी दिक्कतों वाले क्षेत्रों में छूट का प्रावधान है।

खेती के सीजन का सम्मान: बुवाई और कटाई के व्यस्त समय के दौरान इन कामों पर रोक रहेगी ताकि खेती के लिए मजदूरों की कमी न हो।

कन्वर्जेंस मॉडल: यह कानून सिर्फ 'काम देने' तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं को जोड़कर गांव के संपूर्ण विकास (Saturation Model) पर केंद्रित है।

विपक्ष और कार्यकर्ताओं की चिंता

जहां सरकार इसे 'विकसित भारत' की ओर बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दलों और श्रमिक कार्यकर्ताओं ने मनरेगा जैसी 'अधिकार-आधारित' सुरक्षा को खत्म करने पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि बढ़ता डिजिटलाइजेशन और चेहरे की पहचान जैसी तकनीकें गरीब और कम पढ़े-लिखे मजदूरों के लिए बाधा बन सकती हैं।

निष्कर्ष: सरकार का दावा है कि 1 जुलाई 2026 तक मनरेगा पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और तब तक सभी पुराने प्रोजेक्ट्स को नए फ्रेमवर्क में शामिल कर लिया जाएगा। यह नया कानून ग्रामीण भारत को केवल 'मजदूरी' नहीं, बल्कि 'सशक्तिकरण' देने का वादा करता है।

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