कॉर्पोरेट की चमक छोड़ 'मिट्टी के लाल' ने रचा इतिहास: 1250 एकड़ में जैविक साम्राज्य और 40 करोड़ का टर्नओवर

बायोटेक्नोलॉजिस्ट लेखराम यादव ने 'देसी गाय और जैविक खेती' के संगम से बदला राजस्थान का भाग्य, बने देश के अग्रणी 'मिलियनेयर ऑर्गेनिक फार्मर'।

14 May 2026  |  74

 

कोटपूतली, राजस्थान। जब एक वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला छोड़कर खेतों की पगडंडियों को चुनता है, तो केवल फसल नहीं, बल्कि एक नई व्यवस्था का जन्म होता है। राजस्थान के कोटपूतली के रहने वाले लेखराम यादव ने इस बात को सच कर दिखाया है। साढ़े छह साल तक मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट के रूप में कॉर्पोरेट जगत में सेवा देने के बाद, उन्होंने प्रकृति की ओर लौटने का साहसिक निर्णय लिया। आज वह 1250 एकड़ में फैली जैविक खेती और देसी डेयरी मॉडल के जरिए 40 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर कर रहे हैं।

एक मुलाकात जिसने बदल दिया जीवन का उद्देश्य

लेखराम यादव की यह यात्रा एक गहरे आत्मचिंतन से शुरू हुई। एक महिला क्वालिटी मैनेजर से हुई बातचीत, जिसमें उन्होंने रिटायरमेंट के बाद शांत फार्म लाइफ जीने की इच्छा जताई थी, लेखराम के लिए 'टर्निंग पॉइंट' साबित हुई। उन्होंने सोचा कि यदि अंत में यहीं आना है, तो शुरुआत देर से क्यों? बस, यहीं से शुरू हुआ 120 एकड़ से 1250 एकड़ तक का सफर।

डेसी डेयरी मॉडल: बैंक ने नकारा, संकल्प ने संवारा

शुरुआत में जब लेखराम 100 देसी गायों के साथ डेयरी शुरू करना चाहते थे, तो बैंकों ने इसे 'घाटे का सौदा' बताकर लोन देने से मना कर दिया। लेखराम ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक डेयरी के बीच के अंतर को समझा:

नस्ल का चयन: उन्होंने विदेशी एचएफ (HF) या जर्सी के बजाय भारतीय जलवायु के अनुकूल साहीवाल (85%), गिर, राठी और थारपारकर नस्लों को चुना।

नेचुरल इंफ्रास्ट्रक्चर: महंगे और बंद शेड के बजाय उन्होंने गायों के लिए खुला और प्राकृतिक वातावरण तैयार किया, जिससे पशु तनावमुक्त और स्वस्थ रहते हैं।

इनोवेशन और पारंपरिक ज्ञान का अनूठा मेल

लेखराम केवल खेती नहीं कर रहे, बल्कि 'वृक्षा आयुर्वेद' और प्राकृतिक सिद्धांतों को जीवंत कर रहे हैं। उनके फार्म की कुछ अनूठी विशेषताएँ हैं:

अग्निहोत्र और बायो-एंजाइम: फार्म पर रोज सुबह-शाम होने वाले अग्निहोत्र से वातावरण शुद्ध रहता है। वे डीवार्मिंग के लिए इंद्रायणी फल और कैल्शियम के लिए बिना बुझे चूने जैसे घरेलू उपचारों का प्रयोग करते हैं।

लंपी से सुरक्षा: जब देशभर में लंपी बीमारी का कहर था, तब लेखराम के फार्म की गायें अपनी उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता (प्राकृतिक देखभाल) के कारण सुरक्षित रहीं।

एग्री-टूरिज्म: उन्होंने खेती, डेयरी और प्रोसेसिंग को एक साथ जोड़कर 'ऑन-फार्म सिस्टम' विकसित किया है, जहाँ लोग आकर इस मॉडल को देख और सीख सकते हैं।

"खेती और पशुपालन को अलग-अलग बिजनेस मानना ही किसानों की सबसे बड़ी गलती है। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। अगर आप 10 एकड़ खेती पर एक देसी गाय भी रख लें, तो आपकी आधी खाद की जरूरतें पूरी हो जाती हैं।" — लेखराम यादव

सफलता का पैमाना: टर्नओवर और सम्मान

हाल ही में उन्हें 'Millionaire Farmer of India Awards 2025' में 'फर्स्ट रनर अप' के खिताब से नवाजा गया है। उनका 40 करोड़ का टर्नओवर यह साबित करता है कि जैविक उत्पाद (A2 दूध, घी, पनीर) और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की मांग बाजार में चरम पर है।

युवाओं के लिए संदेश: लेखराम युवाओं को 'मार्केट फीड' के बजाय 'खेत के चारे' पर निर्भर रहने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि युवाओं का खेती की ओर लौटना एक शुभ संकेत है, लेकिन सफलता तभी मिलेगी जब वैज्ञानिक समझ को मिट्टी के पारंपरिक ज्ञान के साथ मिलाया जाएगा।

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