नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और घरेलू बाजार में बेलगाम होती महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। वाणिज्य विभाग द्वारा जारी हालिया अधिसूचना के अनुसार, चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर 2026 तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार इस चुनावी और त्योहारी सीजन में आम जनता की जेब पर पड़ने वाले बोझ को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
निर्यात पर रोक की 3 बड़ी वजहें
1. मांग और उत्पादन का बिगड़ता समीकरण
चीनी के चालू सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में उत्पादन के आंकड़े चिंताजनक हैं।
अनुमानित उत्पादन: 280 लाख टन से कम।
घरेलू खपत: 280 लाख टन से अधिक। सप्लाई और डिमांड के इस अंतर के कारण बाजार में चीनी की कीमतें पहले ही पिछले साल के मुकाबले चढ़ने लगी हैं।
2. महंगाई दर में उछाल
देश में बढ़ती थोक और खुदरा महंगाई ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
खुदरा महंगाई (अप्रैल): पिछले साल की तुलना में 3% से अधिक की बढ़ोतरी।
थोक महंगाई: 8% के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुकी है। चीनी जैसी आवश्यक वस्तु की कीमतों में और उछाल पूरी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
3. अल-नीनो और स्टॉक की कमी
मानसून पर अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण गन्ने की पैदावार घटने की आशंका है। चीनी मिलर्स के अनुसार, इस साल सीजन की शुरुआत में स्टॉक केवल 40-45 लाख टन रहेगा, जबकि सामान्यतः यह 70-80 लाख टन तक होता है। स्टॉक की इसी कमी को देखते हुए जुलाई से सितंबर के बीच कीमतों को नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकता है।
वैश्विक बाजार पर असर
भारत, ब्राजील के साथ दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातकों में से एक है। भारत द्वारा निर्यात पर रोक लगाए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कीमतों में भारी तेजी आने की संभावना है। हालांकि, सरकार के लिए घरेलू खाद्य सुरक्षा और मूल्य स्थिरता फिलहाल सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अगले सीजन का इंतजार
चीनी का नया सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होगा, जब मिलों में उत्पादन दोबारा शुरू होने से बाजार में नई चीनी की आवक होगी। तब तक इस प्रतिबंध के जरिए घरेलू स्टॉक को बचाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास किया जाएगा।
निष्कर्ष:
वर्ष 2022-23 की तरह ही सरकार ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। यह प्रतिबंध दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत अपनी आंतरिक अर्थव्यवस्था और 'फूड सिक्योरिटी' को लेकर बेहद सतर्क है।