पंजाब में हाइब्रिड धान पर संकट: केंद्र बनाएगा जांच समिति, मान सरकार को तुरंत 'डिनोटिफिकेशन' का इंतजार

चावल की कम रिकवरी और मिलिंग विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री की अहम बैठक; किसानों को हाइब्रिड बीजों से रोकने की कवायद!

15 May 2026  |  70

 

नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब में धान की खरीद और मिलिंग को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को आश्वासन दिया है कि हाइब्रिड धान के बीजों की अधिसूचना रद्द (denotify) करने की मांग पर विचार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। हालांकि, केंद्र की ओर से इसके लिए किसी निश्चित समय-सीमा की प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है।

पंजाब सरकार की मांग: तुरंत हो कार्रवाई

पंजाब सरकार चाहती है कि गैर-बासमती हाइब्रिड धान की किस्मों को तुरंत डिनोटिफाई किया जाए। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने से पहले किसानों को इन किस्मों को लगाने से रोका जा सके।

विवाद का मुख्य कारण:

कम रिकवरी का दावा: पंजाब का आरोप है कि कुछ हाइब्रिड किस्मों से चावल की रिकवरी 67% से कम होती है, जो भारतीय खाद्य निगम (FCI) के मानकों के अनुसार अनिवार्य है।

मिलिंग में नुकसान: मिल मालिकों का कहना है कि इन बीजों के चावल मिलिंग के दौरान ज्यादा टूटते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है।

केंद्र की सतर्कता और ICAR की रिपोर्ट

केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कानूनी अड़चनों को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।

वैज्ञानिक आधार की कमी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपनी जांच में पाया है कि 2015 के बाद जारी की गई 23 हाइब्रिड किस्में मिलिंग के न्यूनतम मानकों को पूरा करती हैं।

कानूनी चुनौती: बीज कंपनियां बिना ठोस कानूनी और वैज्ञानिक आधार के डिनोटिफिकेशन की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दे सकती हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा हाइब्रिड बीजों पर लगाए गए प्रतिबंध को रद्द कर दिया था।

बैठक के अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

13 मई को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री मान ने केवल बीजों का मुद्दा ही नहीं, बल्कि पंजाब की कृषि से जुड़ी अन्य मांगें भी केंद्र के सामने रखीं:

खाद की आपूर्ति: खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करना।

बीज समिति में प्रतिनिधित्व: 'केंद्रीय बीज समिति' में पंजाब को प्रतिनिधित्व देने की मांग।

सब्सिडी: वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के बीज की सब्सिडी का आवंटन।

विविधीकरण: भूजल संरक्षण और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए केंद्रीय सहयोग।

निष्कर्ष

केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार कपास, दलहन, तिलहन और बागवानी मिशन के माध्यम से पंजाब के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। हालांकि, हाइब्रिड बीजों पर गठित होने वाली समिति की रिपोर्ट ही तय करेगी कि पंजाब के किसानों को इस सीजन में इन किस्मों से दूर रखा जाएगा या नहीं।

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