US-Iran युद्ध का साया: IPL 2026 के शेड्यूल को बदलने की उठी मांग, ईंधन बचाने के लिए 'बिना दर्शकों' के मैच कराने का सुझाव

युद्ध के चलते बढ़े संकट के बीच CTI ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया को लिखा पत्र; हवाई सफर और पेट्रोल-डीजल की फिजूलखर्ची रोकने के लिए 'बायो-बबल' फॉर्मूले की वकालत।

17 May 2026  |  66

 

 

नई दिल्ली,  अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच छिड़े युद्ध से पैदा हुए वैश्विक संकट का असर अब दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग IPL पर भी पड़ता दिख रहा है। युद्ध के कारण ईंधन की संभावित किल्लत और भारत सरकार पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए, आईपीएल 2026 के बाकी बचे मैचों के शेड्यूल को बदलने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली और देश के व्यापारियों के शीर्ष संगठन, 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने ईंधन बचाने की खातिर आईपीएल को सीमित मैदानों पर और बिना दर्शकों के आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।

इस गंभीर समस्या के मद्देनजर CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को एक पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि टीमों की हवाई यात्राओं में कटौती करने के लिए आईपीएल का एक नया और सीमित शेड्यूल जारी किया जाए।

हवाई सफर में स्वाहा हो रहा है लाखों लीटर एविएशन फ्यूल

28 मार्च से शुरू हुए IPL 2026 में टीमें लगातार हवाई और सड़क मार्ग से सफर कर रही हैं। CTI द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस सफर में भारी मात्रा में ईंधन की खपत हो रही है:

चार्टर्ड विमानों का खर्च: आईपीएल टीमों के लिए इस्तेमाल होने वाले बोइंग 737 या एयरबस A320 जैसे चार्टर्ड विमान औसतन 2400 से 3000 लीटर प्रति घंटा ईंधन (ATF) खर्च करते हैं।

प्रति फ्लाइट खपत: एक 2 घंटे की फ्लाइट में लगभग 5,000 से 6,000 लीटर ईंधन खर्च होता है, जो वजन और दूरी के हिसाब से 8,000 लीटर तक भी जा सकता है।

प्रति टीम अनुमानित खर्च: अगर हर टीम के औसतन 10 हवाई दौरों को जोड़ा जाए, तो प्रत्येक टीम लगभग 50,000 से 70,000 लीटर कीमती एविएशन फ्यूल खर्च कर रही है।

मांग: कोरोना काल की तर्ज पर सीमित मैदानों और बिना दर्शकों के हों मैच

बृजेश गोयल ने खेल मंत्री से मांग की है कि देशहित और संकट के इस दौर को देखते हुए आईपीएल को 'नो-स्पेक्टेटर' (बिना दर्शकों के) मोड पर शिफ्ट किया जाए। उनके सुझावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

सीमित स्टेडियम: टूर्नामेंट के बाकी बचे मैचों को किसी एक या दो शहरों के सीमित मैदानों तक ही समेट दिया जाए, जैसा कि कोरोना काल में सफलतापूर्वक किया गया था। इससे टीमों का हवाई सफर पूरी तरह रुक जाएगा।

लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत: एक मैच में औसतन 50,000 दर्शक आते हैं, जिनके आवागमन से हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल खर्च होता है। बिना दर्शकों के मैच होने से इस स्थानीय ईंधन की भी बड़ी बचत होगी।

"जब पूरा देश बचत कर रहा, तो IPL अछूता क्यों?"

CTI चेयरमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की गई अपील का हवाला देते हुए कहा कि आज जब हर सरकारी विभाग, राजनेता, अधिकारी और आम नागरिक संकट के इस दौर में फिजूलखर्ची से बचने की कोशिश कर रहा है, तो आईपीएल को इससे अछूता नहीं रखा जाना चाहिए।

निष्कर्ष: अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और आपूर्ति पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में व्यापारिक संगठन की यह मांग खेल मंत्रालय और बीसीसीआई (BCCI) को आईपीएल के आयोजन को लेकर एक नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर सकती है।

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