चांदी में ₹1,000 का उछाल, ₹2.76 लाख के पार; रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचे रुपये ने थामी सोने की गिरावट

चांदी के आयात पर सरकारी पाबंदी और टूटते रुपये का सर्राफा बाजार पर असर; इंटरनेशनल मार्केट में नरमी के बावजूद घरेलू कीमतें मजबूत।

18 May 2026  |  62

 

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सरकार द्वारा चांदी के आयात पर लगाई गई नई पाबंदियों के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में सोमवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमतों में ₹1,000 प्रति किलोग्राम की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसके दाम ₹2.75 लाख के पार निकल गए। वहीं दूसरी ओर, सोने की कीमतें स्थिर रहीं।

मजबूत होते डॉलर और रिकॉर्ड निचले स्तर (लगभग 96.37) पर पहुंचे भारतीय रुपये ने घरेलू बाजार में सोने की कीमतों को बड़ी गिरावट से बचा लिया।

सर्राफा बाजार का ताजा हाल (सोमवार के भाव)

चांदी की कीमत: ₹1,000 की तेजी के साथ ₹2,76,000 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) पर बंद हुई। शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय यह ₹2,75,000 पर थी।

सोने की कीमत: 99.9 प्रतिशत शुद्धता (प्योरिटी) वाला सोना ₹1,62,800 प्रति 10 ग्राम पर अपरिवर्तित (स्थिर) रहा।

घरेलू बाजार में क्यों आई चांदी में तेजी?

एचडीएफसी (HDFC) सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी के बावजूद घरेलू कीमतें मजबूत रहने के दो मुख्य कारण हैं:

आयात पर तत्काल पाबंदी: केंद्र सरकार ने रुपये पर दबाव कम करने और गैर-जरूरी आयात को रोकने के लिए चांदी के लगभग सभी रूपों के आयात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस कदम से घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता कम होगी, जिससे स्थानीय बाजार में इस पर मिलने वाला प्रीमियम बढ़ सकता है।

कमजोर होता रुपया: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसलने के कारण आयात महंगा हुआ है, जिसने घरेलू स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट को थामने का काम किया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल: क्यों गिर रहे हैं वैश्विक दाम?

वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी दोनों में ही नरमी का रुख देखा गया:

हाजिर सोना (Spot Gold): मामूली गिरावट के साथ 4,535.23 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

अंतरराष्ट्रीय चांदी: लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75.42 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

विशेषज्ञों की राय: मिराए एसेट शेयरखान (Mirae Asset ShareKhan) के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के कारण वैश्विक स्तर पर सोने पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, हाल ही में संपन्न हुआ अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन उम्मीद से अधिक सकारात्मक रहा, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तकनीक, व्यापार और टैरिफ जैसे विवादित मुद्दों को नहीं उठाया। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल आया, जिसने सोने की कीमतों को नीचे धकेलने का काम किया।

एलकेपी (LKP) सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, इस समय सर्राफा बाजार के निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रमों के साथ-साथ रुपये-डॉलर की चाल पर पैनी नजर रख रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है।

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