मसाला किसानों की चमकी किस्मत: ITC के 'गुंटूर प्लांट' से 31,800 से अधिक किसानों को मिला फायदा, निर्यात में भारत बना नंबर वन

2.2 लाख एकड़ में फैली ऑर्गेनिक मसालों की खेती; 'मेक इन इंडिया' इंफ्रास्ट्रक्चर और बारकोड ट्रेसिबिलिटी से वैश्विक बाजारों में बढ़ी भारतीय मसालों की धाक।

18 May 2026  |  66

 

 

नई दिल्ली/कोलकाता। देश की दिग्गज मल्टी-बिजनेस कंपनी आईटीसी लिमिटेड (ITC Ltd) ने सोमवार (18 मई) को अपने 'स्पाइसेज डेवलपमेंट प्रोग्राम' (मसाला विकास कार्यक्रम) के शानदार नतीजों की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक, उसके इस एकीकृत प्रयास से अब तक देश के 31,800 से अधिक मसाला उत्पादक किसानों को संचयी रूप से (Cumulatively) सीधा फायदा पहुंचा है।

इस पहल ने न केवल 2.2 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर उत्पादकता में सुधार किया है, बल्कि टिकाऊ कृषि पद्धतियों (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा देकर निर्यात अवसरों के जरिए किसानों की आय में भी भारी बढ़ोतरी की है।

साल 2025 में ऑर्गेनिक मसालों का सबसे बड़ा निर्यातक बना ITC

कंपनी ने अपने बयान में बताया कि वर्ष 2025 में आईटीसी (ITC) भारत से ऑर्गेनिक मसालों (जैविक मसालों) का सबसे बड़ा निर्यातक बनकर उभरा है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर भारतीय मसालों के लिए एक बहुत बड़ा बाजार तैयार किया है, जिससे भारतीय कृषि मूल्य श्रृंखला (Agri-Value Chain) वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनी है।

एशिया के सबसे बड़े मसाला प्रोसेसिंग प्लांट्स में से एक: गुंटूर फैसिलिटी

इस पूरी सफलता के केंद्र में आंध्र प्रदेश के गुंटूर में स्थित आईटीसी का अत्याधुनिक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र (Spices Processing Facility) है। इस प्लांट की खासियतें इस प्रकार हैं:

विशाल क्षमता: यह प्लांट 6 एकड़ में फैला हुआ है और इसकी सालाना प्रसंस्करण क्षमता 20,000 मीट्रिक टन (MT) से अधिक है।

विविधता: यह एशिया के सबसे बड़े प्रोसेसर्स में से एक है, जो मसालों की 15 से अधिक किस्मों को संभालने में सक्षम है।

एंड-टू-एंड ट्रेसिबिलिटी: इस प्लांट में आधुनिक बारकोड-आधारित सोर्सिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इससे खेत से लेकर पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स तक, हर स्तर पर मसालों की शुद्धता और पारदर्शिता (Visibility) सुनिश्चित होती है।

किसानों की आय में 42% का बंपर उछाल

वैश्विक संस्था 'आईडीएच' (IDH) द्वारा किए गए एक दीर्घकालिक विश्लेषण के अनुसार, आईटीसी के इस कार्यक्रम से जुड़े किसानों की आजीविका पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

"10 साल की अवधि में इस कार्यक्रम से जुड़े किसानों की आय में 42 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बेहतर पैदावार, खेती की लागत में कमी, मसालों की उच्च गुणवत्ता और सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंच मिलने के कारण हुई है।" — आईडीएच (IDH) विश्लेषण रिपोर्ट

'ITC Next' स्ट्रेटजी और किसानों का सशक्तिकरण

आईटीसी लिमिटेड के एग्री बिजनेस डिवीजन के डिवीजनल चीफ एग्जीक्यूटिव एस गणेश कुमार ने इस पहल पर बात करते हुए कहा:

"हमारी 'ITC Next' रणनीति के तहत, हमने कई कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में अपने वैल्यू-एडेड एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (VAAP) पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार किया है, जिसमें मसाले हमारा मुख्य फोकस एरिया हैं। आईटीसी में, किसानों का सशक्तिकरण हमारे देश में टिकाऊ कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के केंद्र में है।"

उन्होंने आगे जोड़ा कि इस एकीकृत दृष्टिकोण से यह सुनिश्चित होता है कि किसान सिर्फ उत्पादक बनकर न रह जाएं, बल्कि वे देश के लिए मूल्य निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें और उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय मसालों की बढ़ती वैश्विक मांग का सीधा लाभ उठा सकें।

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