भारत का कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: ICAR के वैज्ञानिकों ने बनाया पौधों के लिए दुनिया का पहला AI-डिजाइन जीन-एडिटिंग टूल

CRISPR पेटेंट की वैश्विक निर्भरता होगी खत्म; धान (Rice) को मॉडल बनाकर वैज्ञानिकों ने खोजी ऐसी तकनीक, जिससे सूखा और बीमारियों से लड़ना होगा बेहद आसान।

18 May 2026  |  111

 

 

नई दिल्ली/कटक। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के कटक स्थित राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI - जिसे पहले केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कहा जाता था) के वैज्ञानिकों ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Crop Biotechnology) की दुनिया में एक ऐसा ऐतिहासिक आविष्कार किया है, जो पूरी दुनिया में खेती की तस्वीर बदल सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने पौधों के लिए दुनिया का पहला एआई-डिजाइन (AI-Designed) जीनोम-एडिटिंग टूल विकसित और सफलतापूर्वक परीक्षित किया है।

यह तकनीक अब तक इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक CRISPR सिस्टम से कई गुना आगे है, जो पूरी तरह से प्रकृति में पाए जाने वाले जीवाणु प्रोटीनों (Microbial Proteins) पर निर्भर थे।

क्या है यह तकनीक और क्यों है यह क्रांतिकारी?

जीन एडिटिंग को आप एक 'आणविक कैंची' (Molecular Scalpel) की तरह समझ सकते हैं। इसकी मदद से वैज्ञानिक किसी पौधे के डीएनए (DNA) के खास हिस्सों को काटकर या बदलकर उसमें मनचाहे गुण विकसित करते हैं— जैसे कि अधिक पैदावार, सूखा और बाढ़ से लड़ने की क्षमता (Climate Resilience), या रोगों से लड़ने की ताकत।

पारंपरिक तरीका (CRISPR): अब तक इसके लिए बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों से लिए गए प्राकृतिक प्रोटीनों (जैसे Cas9 और Cas12a) का सहारा लिया जाता था, जो कई बार पौधों के सिस्टम में सही से काम नहीं करते थे।

भारतीय वैज्ञानिकों का कमाल: भारतीय टीम ने यह साबित कर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बिल्कुल नए एंजाइम (Enzymes) बिल्कुल शुरुआत (Scratch) से डिजाइन किए जा सकते हैं, जो पौधों के भीतर बिना किसी रुकावट के पूरी सटीकता से काम करते हैं।

नाम दिया 'Plant-OpenCRISPR1' (POC1)

इस नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म को Plant-OpenCRISPR1 (POC1) नाम दिया गया है। यह दरअसल 'OpenCRISPR-1' (OC1) पर आधारित है, जिसे एक अमेरिकी कंपनी ने इंसानी कोशिकाओं (Human Cells) के लिए विकसित किया था। लेकिन, दुनिया में पहली बार किसी ने इस एआई-जनरेटेड तकनीक का सफल प्रदर्शन पौधों पर करके दिखाया है।

वैज्ञानिक कुतुबुद्दीन अली मोल्ला के नेतृत्व में टीम ने धान (Rice) को एक मॉडल के रूप में लिया और यह दिखाया कि यह एआई-डिजाइन टूल पौधों में तीन मुख्य काम बेहद कुशलता से कर सकता है:

जीन नॉकआउट (Gene Knockout): अवांछित या खराब जीन को निष्क्रिय करना।

बेस एडिटिंग (Base Editing): डीएनए के बेस में सटीक बदलाव करना।

प्राइम एडिटिंग (Prime Editing): डीएनए की नई कड़ियों को बेहद सटीकता से जोड़ना या लिखना।

पारंपरिक CRISPR बनाम भारत की नई AI (POC1) तकनीक

विशेषतापारंपरिक CRISPR सिस्टमभारत का नया POC1 (AI) प्लेटफॉर्म
एंजाइम का स्रोतबैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों से प्राप्त प्राकृतिक प्रोटीनलार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (AI) द्वारा स्क्रैच से डिजाइन एंजाइम
पौधों में अनुकूलताकई बार पौधों के आंतरिक सिस्टम में रुकावट आती हैपौधों के लिए विशेष रूप से कस्टमाइज्ड और अत्यधिक कुशल
पेटेंट और खर्चवैश्विक स्तर पर भारी पेटेंट शुल्क और कानूनी पाबंदियांपेटेंट की सीमाओं से मुक्त, सस्ता और अधिक बहुमुखी (Versatile)
उपयोगितासीमित और वैश्विक कंपनियों के एकाधिकार के अधीनअकादमिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए पूरी तरह 'ओपन सोर्स'

पेटेंट की वैश्विक जंग से मिलेगी मुक्ति, सबके लिए होगा मुफ्त

बिज़नेसलाइन (businessline) से बात करते हुए मुख्य वैज्ञानिक कुतुबुद्दीन अली मोल्ला ने बताया कि यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'न्यू फाइटोलॉजिस्ट' (New Phytologist) में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है।

उन्होंने कहा, "हमारा यह आविष्कार यह दिखाता है कि कंप्यूटर द्वारा डिजाइन किए गए एंजाइम भी फसलों में मजबूत जीन एडिटिंग का समर्थन कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म भविष्य में कृषि के लिए कस्टमाइज्ड जीनोम-एडिटिंग सिस्टम बनाने के नए रास्ते खोलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मौजूदा CRISPR तकनीकों से जुड़े वैश्विक बौद्धिक संपदा (IP) और पेटेंट के झंझटों को दूर करने में भारत की मदद करेगा।"

अच्छी बात यह है कि OC1 की तरह ही भारत का POC1 भी शिक्षाविदों और व्यावसायिक उपयोग के लिए पूरी तरह से ओपन (मुफ्त) रहेगा।

इन वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास

इस गौरवशाली खोज को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला के साथ प्रिया दास, रोमियो साहा, देबास्मिता पांडा, चंदना घोष, एस. पी. अविनाश, सोनाली पांडा और मिर्जा जे. बेग शामिल रहे। लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) और विशाल प्रोटीन डेटाबेस की ताकत से उपजी यह भारतीय तकनीक आने वाले समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत का डंका बजाने के लिए तैयार है।

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