डिजिटल दुनिया के 'अदृश्य दुश्मन': जानिए किन देशों में बैठे हैं सबसे खतरनाक हैकर्स और कौन से देश हैं उनके निशाने पर

40% हमलों के पीछे चीनी नेटवर्क, तो रैंसमवेयर के बेताज बादशाह हैं रूसी हैकर्स; जानिए 13,883 हमलों के साथ भारत किस पायदान पर है।

18 May 2026  |  70

 

टेक व साइबर सुरक्षा डेस्क। आज पूरी दुनिया इंटरनेट, डिजिटल बैंकिंग और एआई (AI) तकनीक पर निर्भर हो चुकी है। इस डिजिटल क्रांति ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, 'साइबर अपराधियों' (Cyber Criminals) के लिए सेंधमारी का रास्ता भी उतना ही साफ कर दिया है। आज हालात ये हैं कि चंद मिनटों में बैंक खाते खाली हो जाते हैं, बड़-बड़ी कंपनियों का डेटा चोरी हो जाता है और सरकारी सिस्टम ठप कर दिए जाते हैं।

जब भी किसी बड़े साइबर अटैक की खबर आती है, तो जेहन में एक ही सवाल उठता है— आखिर ये हैकर्स कहां बैठे हैं और किस देश से इन हमलों को अंजाम दिया जा रहा है?

इंटरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और तकनीकी विशेषज्ञों के आंकड़ों के आधार पर इस जटिल सवाल का जवाब सामने आ चुका है।

इन 4 देशों में बैठे हैं दुनिया के सबसे खतरनाक हैकर्स

माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल डिफेंस रिपोर्ट (Digital Defense Report) के मुताबिक, दुनिया के अधिकांश बड़े और रणनीतिक साइबर हमलों के तार मुख्य रूप से चार देशों से जुड़े हैं:

1. चीन (China) — कॉरपोरेट जासूसी का गढ़

ग्लोबल साइबर थ्रेट रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में होने वाले कुल साइबर हमलों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चीनी IP एड्रेस या चीन से जुड़े हैकर समूहों द्वारा संचालित होता है। ये हैकर्स पैसे कमाने से ज्यादा कॉरपोरेट जासूसी (Corporate Espionage), संवेदनशील सरकारी डेटा और बड़ी कंपनियों की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी चुराने पर फोकस करते हैं, ताकि रणनीतिक बढ़त हासिल की जा सके।

2. रूस (Russia) — रैंसमवेयर के बेताज बादशाह

वैश्विक साइबर हमलों में रूस की हिस्सेदारी 15 से 25 प्रतिशत के बीच आंकी गई है। रूस के हैकर समूह 'रैंसमवेयर' (Ransomware) हमलों के लिए दुनिया भर में कुख्यात हैं। ये किसी भी संस्थान के कंप्यूटर सिस्टम को लॉक कर देते हैं और उसे खोलने के बदले फिरौती (मोटी रकम) मांगते हैं। इसके अलावा ये वेबसाइट्स को ठप करने के लिए 'DDoS' अटैक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं।

3. उत्तर कोरिया और ईरान (North Korea & Iran) — वित्तीय और राजनीतिक दबाव

उत्तर कोरियाई हैकर्स पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच देश की अर्थव्यवस्था चलाने के लिए 'क्रिप्टोकरेंसी चोरी' और बड़े वित्तीय फ्रॉड करने के आरोप लगते रहे हैं। वहीं ईरान से जुड़े ग्रुप राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने के लिए दुश्मन देशों के बिजली ग्रिड, रक्षा प्रणालियों और संवेदनशील सरकारी डेटा को निशाना बनाते हैं।

विशेषज्ञों की राय: साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी हमले की लोकेशन का किसी देश में दिखना इस बात का 100% सबूत नहीं होता कि हैकर वहीं बैठा है। हैकर्स अपनी असली पहचान छिपाने के लिए अक्सर वीपीएन (VPN), क्लाउड सर्वर और ' प्रॉक्सी नेटवर्क' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

साइबर हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित देश (वैश्विक आंकड़े)

रैंकिंगदेश का नामस्थिति और प्रभावित क्षेत्र
1अमेरिकासबसे बड़ा शिकार। बैंकिंग, अस्पताल और सरकारी एजेंसियां निशाने पर रहीं।
2यूनाइटेड किंगडम (UK)फिशिंग, पासवर्ड चोरी और ऑनलाइन फ्रॉड में भारी उछाल।
3कनाडाअस्पताल, स्कूल और ऊर्जा (Energy) कंपनियां लगातार निशाने पर रहीं।
4जर्मनीऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री के रिसर्च डेटा की चोरी।
5ऑस्ट्रेलियासरकारी प्लेटफॉर्म, टेलीकॉम नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कंपनियां प्रभावित।
6भारतडिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते चलन के बीच बड़ा टारगेट।

 

भारत पर बढ़ा खतरा: सूची में छठे स्थान पर पहुंचा देश

भारत में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग जितनी तेजी से आम लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बने हैं, उतनी ही तेजी से यहां साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ी है। देश में फिशिंग लिंक, ओटीपी फ्रॉड (OTP Fraud) और पासवर्ड हैकिंग के मामले लगातार दर्ज किए जा रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 13,883 साइबर घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इन डरावने आंकड़ों के साथ ही भारत अब दुनिया में साइबर हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची में छठे (6th) स्थान पर पहुंच गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि बढ़ते डिजिटल फुटप्रिंट के साथ ही देश के हर नागरिक को साइबर स्वच्छता (Cyber Hygiene) और जागरूकता अपनाने की सख्त जरूरत है।

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