बीजिंग में ट्रंप और पुतिन का भव्य स्वागत, लेकिन प्रोटोकॉल में अंतर: किसे मिली ज्यादा तरजीह, वाशिंगटन से मॉस्को तक कूटनीतिक चर्चा

दिखावे का पद बनाम पोलित ब्यूरो की पावर! अमेरिकी राष्ट्रपति को लेने पहुंचे चीनी उपराष्ट्रपति, तो रूसी राष्ट्रपति की अगवानी में खुद खड़े रहे विदेश मंत्री वांग यी।

20 May 2026  |  52

 

बीजींग / मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन के ऐतिहासिक दौरे से रवाना होने के महज सात दिन बाद, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ बीजिंग पहुंचे हैं। चीन की धरती पर दोनों वैश्विक महाशक्तियों के राष्ट्रध्यक्षों का भव्य और रेड कारपेट स्वागत किया गया। हालांकि, इस भव्यता के बीच चीन द्वारा अपनाए गए अलग-अलग 'राजनयिक प्रोटोकॉल' (Diplomatic Protocol) ने वैश्विक कूटनीतिज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

बीजिंग एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं की अगवानी के लिए भेजे गए अधिकारियों के स्तर को लेकर अब वाशिंगटन से लेकर मॉस्को और बीजिंग तक यह बहस छिड़ गई है कि चीन ने दोनों में से किसे अधिक तरजीह दी है।

कूटनीतिक प्रोटोकॉल का अंतर: ट्रंप बनाम पुतिन

डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत: अमेरिकी राष्ट्रपति जब बीजिंग एयरपोर्ट पर उतरे, तो उनके स्वागत के लिए चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग खुद पहुंचे थे। इसके अलावा विदेश विभाग के उप मंत्री भी वहां मौजूद थे।

व्लादिमीर पुतिन का स्वागत: 19 मई को जब रूसी राष्ट्रपति बीजिंग पहुंचे, तो उनकी अगवानी के लिए चीन के शक्तिशाली विदेश मंत्री वांग यी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। पुतिन के साथ उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और कई दिग्गज उद्योगपति भी चीन पहुंचे हैं।

पद बड़ा या पावर? कूटनीतिक गलियारों में विश्लेषण

इस प्रोटोकॉल के अंतर को लेकर दुनिया भर के विश्लेषक और पत्रकार अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। इस विवाद के मुख्य रूप से दो पहलू सामने आ रहे हैं:

1. पोलित ब्यूरो का वास्तविक कद (पावर गेम):

स्वतन्त्र पत्रकार ब्रायन मैक्डोनॉल्ड सहित कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कूटनीतिक और व्यावहारिक रूप से पुतिन का स्वागत अधिक शक्तिशाली रहा। इसका कारण यह है कि पुतिन की अगवानी करने वाले विदेश मंत्री वांग यी वर्तमान में चीन की सत्ता के शीर्ष केंद्र यानी 'पोलित ब्यूरो' के सक्रिय सदस्य हैं। इसके विपरीत, ट्रंप का स्वागत करने वाले उपराष्ट्रपति हान झेंग अब न तो पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं और न ही कम्युस्टि पार्टी की केंद्रीय समिति में शामिल हैं। चीन में असली ताकत पोलित ब्यूरो के पास होती है, इसलिए इसके सदस्य को एयरपोर्ट भेजना पुतिन को 'विशेष अतिथि' मानने का संकेत है।

2. संवैधानिक पद की गरिमा (दर्जे का खेल):

दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि चीन में उपराष्ट्रपति का पद पदानुक्रम (Hierarchy) में विदेश मंत्री से काफी ऊपर आता है। ट्रंप के स्वागत के लिए सीधे देश के उपराष्ट्रपति को एयरपोर्ट भेजना सामान्य प्रोटोकॉल को तोड़कर दिया गया एक दुर्लभ सम्मान था, जो यह दिखाता है कि चीन इस यात्रा को कितनी रणनीतिक अहमियत दे रहा था।

मॉस्को का रुख: 'दिखावे में नहीं, बातचीत के एजेंडे में है असली दम'

देश और नेताचीन यात्रा का मुख्य एजेंडा व कूटनीतिक घटनाक्रम
अमेरिका (डोनाल्ड ट्रंप)13-15 मई तक यात्रा। राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात, गार्ड ऑफ ऑनर और कुछ महत्वपूर्ण डील्स पर चर्चा। कूटनीतिक तौर पर इसे बेहद खास बताया गया।
रूस (व्लादिमीर पुतिन)19 मई को आगमन। यात्रा के दौरान दोनों देश कुल 40 समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें चीन से रूस तक सीधी रेल सेवा शुरू करना शामिल है।

इस प्रोटोकॉल तुलना पर छिड़ी बहस के बीच रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने इस पर विराम लगाने की कोशिश की है। समाचार एजेंसी 'तास' से बात करते हुए पेस्कोव ने कहा:

"पुतिन और ट्रंप की बीजिंग यात्राओं के दौरान अपनाए गए राजनयिक प्रोटोकॉल की आपस में तुलना करने का कोई मतलब नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि मुलाकातों और वार्ताओं की विषयवस्तु (कंटेंट) क्या है, न कि औपचारिक और बाहरी दिखावे में।"

शी जिनपिंग की 'लाल रेखा' और वैश्विक व्यवस्था

पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक स्तर पर चल रहे "जंगलराज" के दौर का जिक्र किया और मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) के संकट को लेकर एक स्पष्ट लाल रेखा खींच दी। दोनों ही शीर्ष नेताओं ने अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ एक 'बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था' (Multipolar World Order) बनाने की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है।

अन्य खबरें