UNSC में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: आतंकवाद और अफगानिस्तान में निर्दोषों की हत्या पर वैश्विक मंच पर बेनकाब हुआ इस्लामाबाद

'जिसका इतिहास खुद नरसंहार से कलंकित हो, वह दूसरों पर उंगली न उठाए' — संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने याद दिलाया 1971 का पाप और रमजान में अस्पताल पर हुए हमले का काला सच।

21 May 2026  |  61

 

न्यूज डेस्क, संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क): सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आयोजित वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पाखंड और क्रूर चेहरे को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों को उठाने की नापाक कोशिश का करारा जवाब देते हुए, उसे आतंकवाद और अफगानिस्तान में की जा रही बर्बरता पर जमकर लताड़ा।

राजदूत पर्वतनेनी ने इस महीने के लिए UNSC की अध्यक्षता संभालने पर चीन को बधाई देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघर्ष की स्थितियों में नागरिकों की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय शांति का मुख्य तत्व है और भारत इसके लिए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का आह्वान करता है।

2025 में नागरिक मौतों में गिरावट, लेकिन ड्रोन और AI का दुरुपयोग चिंताजनक

भारतीय दूत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि तीन साल की लगातार वृद्धि के बाद वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर नागरिक मौतों में पहली बार गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद, साल 2025 में दुनिया के 20 सशस्त्र संघर्षों में 37,000 से अधिक नागरिकों की जान गई, जो बेहद चिंताजनक है।

भारत ने युद्ध के बदलते तौर-तरीकों, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों को तैनात करने के लिए ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई। राजदूत ने मांग की कि:

"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वायत्त प्रणालियों जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग हर हाल में अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में ही होना चाहिए।"

सीमा पार आतंकवाद पर घेरा: "कोई भी बहाना नागरिकों पर हमले को सही नहीं ठहरा सकता"

भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपनी मजबूत आवाज बुलंद की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं, शरण देते हैं या समर्थन देते हैं, उन्हें निश्चित रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद अपने सभी रूपों में मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

UNAMA की रिपोर्ट से खुली पोल: अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का कच्चा चिट्ठा

जब पाकिस्तान ने बहस के दौरान भारत के आंतरिक मामलों का जिक्र करने का दुस्साहस किया, तो भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) के आधिकारिक दस्तावेजों को सामने रखकर उसे निरुत्तर कर दिया।

95 में से 94 घटनाएं पाकिस्तान के नाम: UNAMA की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में पाकिस्तान की सेना द्वारा की गई सीमा पार सशस्त्र हिंसा के कारण अफगानिस्तान में 750 नागरिक हताहत (मौत और चोटें) हुए। अफगानिस्तान में नागरिक हताहत होने की 95 घटनाओं में से 94 घटनाएं सीधे तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के कारण हुईं।

रमजान में अस्पताल पर कायरतापूर्ण हमला: पाकिस्तान की क्रूरता का सबसे वीभत्स उदाहरण देते हुए भारतीय राजदूत ने बताया कि इसी साल मार्च में, रमजान के पवित्र महीने के दौरान, पाकिस्तान ने काबुल में ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर बर्बर हवाई हमला किया था। शाम की नमाज (तरावीह) के ठीक बाद हुए इस हमले में 269 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए। भारत ने सवाल दागा कि एक अस्पताल को सैन्य निशाना कैसे बनाया जा सकता है?

1971 के 'ऑपरेशन सर्चलाइट' और 4 लाख महिलाओं से सामूहिक बलात्कार की दिलाई याद

पाकिस्तान के पाखंड पर अंतिम और सबसे तीखा प्रहार करते हुए राजदूत पर्वतनेनी ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए जघन्य अपराधों की याद दिलाई। उन्होंने कहा:

"1971 में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के दौरान, पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा 4,00,000 महिला नागरिकों के व्यवस्थित और संस्थागत सामूहिक बलात्कार के अभियान को मंजूरी दी थी। जो देश अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और नरसंहार करता है, उससे ऐसे जघन्य कृत्यों की ही उम्मीद की जा सकती है।"

भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का यह आचरण उसकी आंतरिक विफलताओं को छिपाने की दशकों पुरानी कोशिश है। बिना किसी विश्वास, कानून और नैतिकता के चल रहे पाकिस्तान के इस दुष्प्रचार को अब पूरी दुनिया अच्छी तरह समझ चुकी है।

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