तेहरान/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ी और राहत भरी वैश्विक खबर आ रही है। ईरान और अमेरिका के बीच एक नए परमाणु समझौते (Nuclear Deal) की घोषणा कभी भी हो सकती है। तेहरान से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक गलियारों में हलचल अभूतपूर्व रूप से तेज है। सूत्रों के मुताबिक, कतर की मध्यस्थता से तैयार किए गए एक विशेष प्रस्ताव (ड्राफ्ट प्रपोजल) पर दोनों देश बुनियादी रूप से राजी हो गए हैं। अमेरिका का यह ड्राफ्ट ईरान को मिल चुका है, जिस पर फिलहाल तेहरान में उच्च स्तरीय समीक्षा और मंथन चल रहा है।
इस बीच, इस कूटनीतिक घटनाक्रम को गति देने के लिए पाकिस्तान की भूमिका भी अहम नजर आ रही है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बुधवार को तेहरान दौरे के तुरंत बाद अब पाकिस्तानी सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर भी ईरान के दौरे पर हैं, जिससे इस समझौते को लेकर सैन्य और रणनीतिक समीकरणों को भी मजबूत माना जा रहा है।
कतर का 'वन-पेज' फॉर्मूला: हज के बाद होगी निर्णायक बैठक
अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' और 'अल अरबिया' के मुताबिक, कतर के प्रधानमंत्री अल थानी की व्यक्तिगत सक्रियता के बाद इस कूटनीतिक मसौदे को तैयार किया गया है। कतर की कोशिश दोनों पक्षों को संतुष्ट रखकर पूरे मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करने की है।
ज्ञापन के रूप में है प्रस्ताव: दोनों देशों के बीच मतभेदों को पाटने के लिए पहले 'एक पन्ने' के शुरुआती प्रस्ताव पर सहमति बनाई जा रही है।
आमने-सामने की वार्ता: यदि इस शुरुआती मसौदे पर ईरान का सकारात्मक जवाब आ जाता है, तो इस महीने के आखिर में हज खत्म होने के तुरंत बाद दोनों पक्षों के बीच विस्तृत और पूर्ण समझौते के लिए आमने-सामने की उच्च स्तरीय बैठक कराई जाएगी।
बुधवार को वाशिंगटन में पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सकारात्मक संकेत दिए। हालांकि उन्होंने कहा कि समझौते की आधिकारिक घोषणा किस प्रारूप में होगी, इस पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
कहां फंसा है पेच? दोनों पक्षों की शर्तें और मांगें
इस समझौते को ऐतिहासिक माना जा रहा है, लेकिन दोनों देशों की अपनी-अपनी सख्त शर्तें हैं जिन पर कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहे हैं:
अमेरिका की 3 मुख्य शर्तें:
परमाणु हथियार पर पूर्ण रोक: ईरान आधिकारिक रूप से यह घोषित करे कि वह कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं बनाएगा।
यूरेनियम की शिफ्टिंग: ईरान अपने अब तक के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को अमेरिका या किसी सुरक्षित तीसरे देश में शिफ्ट करे।
प्रॉक्सी नेटवर्क का अंत: खाड़ी देशों और मिडिल ईस्ट में ईरान अपने सशस्त्र प्रॉक्सी समूहों को पूरी तरह नियंत्रित या खत्म करे।
ईरान का पलटवार और मांगें:
मिसाइल कार्यक्रम पर नो-टॉक: ईरान का साफ कहना है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता: ईरान चाहता है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर टोल बूथ लगाने की उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले।
आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति: ईरान ने अमेरिका से उसके ऊपर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को तत्काल हटाने और अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) किए गए अरबों डॉलर के फंड को वापस जारी करने की मांग की है।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इस कतरी ड्रॉफ्ट पर अपनी अंतिम मुहर लगा देता है, तो यह इस दशक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीतों में से एक होगी। ईरान का आधिकारिक जवाब आते ही दोनों देश वैश्विक मंच पर इसकी घोषणा कर सकते हैं।