हैदराबाद में खुलेगा Microsoft का सबसे बड़ा डेटा सेंटर, भारत बनेगा दुनिया का नया ‘AI और क्लाउड हब’

इसी साल शुरू हो सकता है माइक्रोसॉफ्ट का मेगा प्रोजेक्ट; भारतीय टेक कंपनियों में 'कोपायलट' की भारी डिमांड, जानें आपके मोबाइल-लैपटॉप से क्या है इसका कनेक्शन।

21 May 2026  |  74

 

बिजनेस और टेक डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड सर्विसेज की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) भारत में एक बड़ा दांव खेलने जा रही है। कंपनी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अपना सबसे बड़ा डेटा सेंटर तैयार कर रही है, जो इसी साल (2026) शुरू हो सकता है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है और यह भारत में कंपनी का अब तक का सबसे विशाल डेटा सेंटर होगा।

माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इसके आधिकारिक साइज का खुलासा नहीं किया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सेंटर देश में क्लाउड और एआई की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा।

भारत में 17.5 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश

भारत का विशाल इंटरनेट यूजर बेस और बेहतरीन इंजीनियरिंग टैलेंट माइक्रोसॉफ्ट को लगातार आकर्षित कर रहा है। इसी के मद्देनजर कंपनी ने पिछले साल भारत में 17.5 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया था, जो इससे पहले घोषित किए गए 3 बिलियन डॉलर के निवेश के अतिरिक्त है।

माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंडोक के मुताबिक: "भारत में कंपनी के 'Azure' क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई असिस्टेंट 'कोपायलट' (Copilot) की भारी मांग है। देश की दिग्गज आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, कॉग्निजेंट और टीसीएस (TCS) के पास ही लगभग 50,000 कोपायलट असिस्टेंट एक्टिव हैं।"

आखिर क्या होते हैं डेटा सेंटर और क्यों है इनकी जरूरत?

आसान शब्दों में कहें तो इंटरनेट, क्लाउड स्टोरेज और एआई सर्विसेज को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद शक्तिशाली कंप्यूटर सर्वरों की जरूरत होती है। इन भारी-भरकम सर्वरों को सुरक्षित रखने के लिए कई एकड़ में फैले विशेष परिसर बनाए जाते हैं, जिन्हें डेटा सेंटर कहा जाता है। इनमें अत्याधुनिक मेमोरी चिप्स और सुपर-फास्ट GPUs (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) का इस्तेमाल होता है।

...तो इसलिए महंगे हो रहे हैं मोबाइल और लैपटॉप!

डेटा सेंटर्स की इस बढ़ती संख्या का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ रहा है। दरअसल, एआई डेटा सेंटर्स में एडवांस मेमोरी चिप्स की खपत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इस वजह से ग्लोबल मार्केट में मोबाइल और लैपटॉप जैसे पर्सनल डिवाइसेस के लिए चिप्स की भारी कमी (Shortage) हो गई है। यही मुख्य कारण है कि पिछले कुछ समय से मोबाइल और लैपटॉप की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है।

AI क्रांति ने दी डेटा सेंटर्स को नई रफ्तार

ऐसा नहीं है कि डेटा सेंटर पहली बार बन रहे हैं, लेकिन जनरेटिव एआई (Generative AI) और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) के आने के बाद इनकी जरूरत कई गुना बढ़ गई है। आज के समय में रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग सर्विसेज को प्रोसेस करने के लिए सामान्य नहीं बल्कि 'हाइपर-स्केल' डेटा सेंटर्स की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि टेक जगत की हर बड़ी कंपनी भारत जैसे उभरते बाजार में अपने पैर जमाने के लिए ज्यादा से ज्यादा डेटा सेंटर स्थापित करने की होड़ में जुटी हुई है।

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