ग्लोबल संकट के बीच भारतीय कृषि में बड़े बदलाव की तैयारी: खाद की कमी से निपटने के लिए बनेंगे नए बीज और कीटनाशक कानून

पश्चिम एशिया में तनाव से फंसा खाद का आयात, सरकार ने जारी की ₹41,534 करोड़ की सब्सिडी; 1 जून से शुरू होगा देशव्यापी 'खेत बचाओ अभियान'।

21 May 2026  |  58

 

कृषि और नीतिगत डेस्क: वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और मौसम के बदलते मिजाज के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र इस समय एक बड़े नीतिगत बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खादों की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अब टिकाऊ खेती, डिजिटल सुधारों और कड़े कानूनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में साफ किया कि सरकार किसानों को इस वैश्विक संकट से बचाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

1. 28 देशों से खाद जुटाने की कवायद, विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील

भारत अपनी जरूरत के उर्वरकों (Fertilisers) के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए भारत सरकार वर्तमान में दुनिया के 28 देशों के नेटवर्क से खाद के स्टॉक सुरक्षित करने में जुटी है। कृषि मंत्री ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन के लिए फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। उन्होंने राज्य सरकारों और किसानों से रासायनिक खादों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने और 'ऑर्गेनिक व नेचुरल फार्मिंग' को अपनाने की अपील की है।

2. ₹41,534 करोड़ की भारी-भरकम सब्सिडी और नए कानून

बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों से किसानों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने खजाने का मुंह खोल दिया है:

सब्सिडी और कीमतों पर कैप: सरकार ने न्यूट्रिएंट-बेस्ड सब्सिडी के लिए ₹41,534 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके तहत यूरिया की कीमत ₹266 प्रति बैग और डीएपी (DAP) की कीमत ₹1,350 प्रति बैग पर कैप (सीमित) कर दी गई है।

संसद में आएंगे दो नए बिल: नकली कीटनाशकों और घटिया बीजों से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सरकार आगामी संसद सत्र में नया कीटनाशक अधिनियम (Pesticides Act) और नया बीज अधिनियम (Seeds Act) पेश करेगी। इन कानूनों के तहत दोषियों के खिलाफ सख्त निगरानी और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा।

3. 'किसान आईडी' (Farmer ID) और 1 जून से 'खेत बचाओ अभियान'

डिजिटल सुधार: ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण, सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे और तेजी से पहुंचाने के लिए सरकार 'किसान आईडी' (Farmer ID) कार्यक्रम में तेजी ला रही है। इसके तहत देश के सभी किसानों का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

खेत बचाओ अभियान: किसानों को आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ प्रथाओं के प्रति जागरूक करने के लिए 1 जून से 15 जून तक देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” लॉन्च किया जाएगा।

4. अल-नीनो का खतरा: मोनोक्रॉपिंग छोड़ 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' अपनाने की सलाह

कृषि मंत्री ने अल-नीनो (El Niño) के कारण कम बारिश की आशंका पर चिंता जताते हुए किसानों को सूखा-प्रतिरोधी फसलों को चुनने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अब केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना (Monocropping) सुरक्षित नहीं है। किसानों को अपनी आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए कृषि के साथ-साथ डेयरी, मत्स्य पालन (Fisheries), बागवानी और पशुपालन जैसी संबद्ध गतिविधियों (Integrated Farming) को जोड़ना होगा।

राज्यों ने भी बढ़ाए कदम (ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल)

इस सम्मेलन में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहित बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री माझी ने कम पानी में उगने वाले और पोषक तत्वों से भरपूर 'मिलेट्स' (बाजरा/मोटा अनाज) को 'सुपरफूड' बताते हुए इसके उत्पादन और पारंपरिक बीजों के संरक्षण पर जोर दिया। राज्यों ने कृषि-उद्यमिता को बढ़ावा देने और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स विकसित करने की जरूरत को रेखांकित किया।

निष्कर्ष: खाद के अंतरराष्ट्रीय संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय कृषि को अब आत्मनिर्भर और लचीला बनाना बेहद जरूरी है। सरकार के ये डिजिटल, वित्तीय और कानूनी सुधार भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

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