प्रांतीय और कृषि डेस्क:महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले राज्य के अन्नदाताओं के लिए बड़ी राहतों की बौछार कर दी है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति और खरीफ तैयारियों की समीक्षा बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि राज्य के सभी पात्र किसानों को 30 जून से पहले कृषि ऋण माफी का लाभ दे दिया जाएगा।
इस निश्चित समयसीमा के ऐलान से किसानों और बैंकिंग संस्थानों के बीच चल रहा असमंजस पूरी तरह खत्म हो गया है और किसानों के लिए आगामी सीजन के लिए नया लोन लेने का रास्ता साफ हो गया है।
फसल लोन के लिए 'सिबिल स्कोर' का झंझट खत्म
बैंकिंग प्रक्रियाओं में किसानों को होने वाली दिक्कतों को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब महाराष्ट्र में फसल ऋण (Crop Loan) लेने के लिए किसी भी किसान से सिबिल स्कोर (CIBIL Score) की मांग नहीं की जा सकती।
असुविधा बर्दाश्त नहीं: सीएम फडणवीस ने कहा, "हमने राष्ट्रीयकृत बैंकों को स्पष्ट कर दिया है कि सिबिल स्कोर के नाम पर किसी भी किसान को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। बैंकिंग मुख्यालयों को अपनी हर स्थानीय शाखा को इसके लिए बकायदा लिखित अधिसूचना जारी करनी होगी।"
आरबीआई (RBI) की मुहर: इस बैठक में मौजूद भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने भी सरकार के इस रुख का समर्थन किया और आश्वासन दिया कि सिबिल स्कोर के कारण किसी भी किसान का लोन नहीं रुकेगा।
क्या होता है सिबिल स्कोर: यह तीन अंकों की एक संख्या होती है, जो किसी व्यक्ति की लोन चुकाने की क्षमता और क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। आमतौर पर बैंक इसके आधार पर ही लोन देते हैं, लेकिन किसानों के हित में अब इसे अनिवार्य सूची से बाहर कर दिया गया है।
राष्ट्रीयकृत बैंकों को 80% टारगेट पूरा करने का अल्टीमेटम
राज्य के कृषि ऋण वितरण के आंकड़ों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में जिला सहकारी बैंक और ग्रामीण बैंक कुल कृषि ऋण का 67 प्रतिशत हिस्सा अकेले संभालते हैं, जबकि बड़े राष्ट्रीयकृत बैंकों की हिस्सेदारी मात्र 26 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि वे सुस्ती छोड़ें और अपने निर्धारित कृषि ऋण वितरण लक्ष्यों का कम से कम 80 प्रतिशत सख्ती से हासिल करें।
कम बारिश का खतरा: 'महाविस्तार' एआई ऐप और 'जलयुक्त शिवार' से निपटेगी सरकार
मौसम विभाग के अनुमानों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने आगामी सीजन में जलवायु संबंधी गंभीर जोखिमों को भी स्वीकार किया।
मौसम का पूर्वानुमान: इस वर्ष राज्य में केवल 88 प्रतिशत वर्षा होने की संभावना है। बारिश में इस संभावित गिरावट को देखते हुए फसलों पर नमी का दबाव (Moisture Stress) बढ़ सकता है।
आकस्मिक योजना: सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं, जिसके तहत 'जलयुक्त शिवार' (जल संरक्षण अभियान) के कामों में तेजी लाई जाएगी।
'महाविस्तार' मोबाइल ऐप लॉन्च: किसानों की मदद के लिए राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 'महाविस्तार' ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप फसल के पैटर्न की सटीक जानकारी देगा और किसानों के खेती से जुड़े हर सवाल का सीधे जवाब देगा।
खादों की कालाबाजारी पर 'वीडियोग्राफी' से नजर
इस वर्ष वैश्विक उत्पादन दबाव के कारण उर्वरकों (Fertilisers) की सप्लाई चेन प्रभावित है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार खादों की उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रख रही है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "कृषि उर्वरकों के औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाले अवैध ट्रांसफर और कालाबाजारी को रोकने के लिए राज्य प्रशासन अब अनिवार्य वीडियोग्राफी प्रोटोकॉल लागू करेगा।"
निष्कर्ष: खरीफ बुवाई के ठीक पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह निर्णायक हस्तक्षेप महाराष्ट्र के कृषि संकट को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा। कर्जमाफी की तारीख तय होने और ऋण प्रक्रियाओं के आसान होने से राज्य के किसानों ने बड़ी राहत की सांस ली है।