NEET पेपर लीक: CBI की जांच में बड़ा खुलासा, ब्यूटी पार्लर मालकिन से लेकर डॉक्टर तक जुड़े तार

मनी ट्रेल और डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाल रही सीबीआई; कंसल्टेंसी संचालक और सस्पेंडेड शिक्षिका से पुणे में कड़े सवाल।

22 May 2026  |  102

 

नई दिल्ली/पुणे। मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में अब एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी संचालक, निलंबित कॉलेज शिक्षिका, ब्यूटी पार्लर मालकिन और एक नामी बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) सीधे तौर पर जांच एजेंसी के रडार पर आ गए हैं। सीबीआई की टीम अब इस पूरे रैकेट के वित्तीय लेनदेन (Money Trail), डिजिटल फुटप्रिंट्स और संदिग्ध लाभार्थियों की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है।

 जांच के केंद्र में आए ये 4 मुख्य किरदार

गुरुवार को हुई कार्रवाई के बाद इस रैकेट से जुड़े कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं, जिनसे सीबीआई सघन पूछताछ कर रही है:

शुभम खैरनार (कंसल्टेंसी संचालक): यह आरोपी एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी चलाता था, जो मेडिकल उम्मीदवारों का मार्गदर्शन करती थी। सीबीआई इसे पुणे लाकर पहले से गिरफ्तार एक आरोपी के साथ इसके संबंधों और बिचौलिए की भूमिका की जांच कर रही है।

मनीषा मंधारे (निलंबित शिक्षिका): पुणे के मॉडर्न कॉलेज से जुड़ी और एनटीए (NTA) से संबद्ध इस शिक्षिका पर परीक्षा से पहले पेपर लीक करने और उसे आगे बढ़ाने का आरोप है।

मनीषा वाघमारे (ब्यूटी पार्लर मालकिन): शिक्षिका मनीषा मंधारे की पड़ोसी वाघमारे से भी दोबारा पूछताछ की गई है कि लीक पेपर उन तक कैसे पहुंचे और आगे कैसे बांटे गए।

लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ (डॉक्टर): इस डॉक्टर पर संदेह है कि उन्होंने लातूर के सेवानिवृत्त केमिस्ट्री लेक्चरर प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी के माध्यम से अपने बच्चे के लिए भारी रकम चुकाकर लीक पेपर खरीदा था। जांचकर्ता कुलकर्णी को ही इस लीक का मुख्य स्रोत मान रहे हैं।

 मोटे पैसे देकर खरीदे गए पेपर, बिचौलियों का बड़ा नेटवर्क

जांचकर्ताओं को पुख्ता अंदेशा है कि डॉक्टरों सहित कई रसूखदार माता-पिता ने अपने बच्चों को परीक्षा में पास कराने के लिए प्रश्न पत्र पहले से प्राप्त करने के एवज में बिचौलियों को भारी-भरकम रकम चुकाई थी। इस सिलसिले में कई जिलों के परिवारों से पूछताछ की जा चुकी है और कई संदिग्ध अभी भी एजेंसी की कड़ी निगरानी में हैं। सीबीआई का पूरा ध्यान अब बिचौलियों की इस पूरी चेन और उनके वित्तीय व डिजिटल संचार रिकॉर्ड को खंगालने पर है।

 NTA का बयान: 'हमारे सिस्टम से समझौता नहीं हुआ'

इस बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने संसदीय समिति के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि उनके आंतरिक सिस्टम के जरिए पेपर के साथ कोई समझौता हुआ है। हालांकि, एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले पर सीबीआई की जांच ही अंतिम और निर्णायक मानी जाएगी।

याद दिला दें: इस साल 22 लाख से अधिक छात्रों ने नीट-यूजी की परीक्षा दी थी। लेकिन देशव्यापी विरोध और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी व पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद, आगामी 12 मई को एनटीए ने इस परीक्षा को पूरी तरह रद कर दिया था। अब सीबीआई इस साजिश की तह तक जाने के लिए दिन-रात एक कर रही है।

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