भीषण गर्मी में हाहाकार: मुंगेर के सोनरवा गांव में महीने भर से नल-जल योजना ठप, नदी का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

300 की आबादी पर गहराया पेयजल संकट; पानी टंकी के सामने ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, विभाग बोला— रांची से आ रहे मिस्त्री, जल्द सुधरेगी व्यवस्था।

22 May 2026  |  116

 

मुंगेर। एक तरफ जहां पूरा प्रदेश रिकॉर्डतोड़ गर्मी और उमस से तप रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर प्रखंड से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीम बांध के अंतर्गत आने वाले सोनरवा गांव (वार्ड संख्या 12, गंगटा पंचायत) में पिछले एक महीने से नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है। चिलचिलाती धूप के बीच बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीणों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा और उन्होंने पानी टंकी के सामने इकट्ठा होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

 नदी के दूषित पानी से बुझ रही है प्यास

लगभग 300 की आबादी वाले इस आदिवासी बहुल गांव में पेयजल का दूसरा कोई पुख्ता साधन नहीं है। स्थानीय ग्रामीण सुमित कोड़ा, राशि कोड़ा, जितिया देवी और किरण देवी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि शुद्ध पानी न मिलने के कारण वे भीम बांध नदी से पानी ढोकर लाने और उसे ही पीने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में नदी का पानी इस्तेमाल करना उनकी सेहत के लिए भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

 ' सीएम के गृह विधानसभा का यह हाल' — वार्ड सदस्य का तंज

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर विभाग को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

राजनीतिक पारा भी चढ़ा: मामले पर सवाल उठाते हुए स्थानीय वार्ड सदस्य संतन कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने इस लापरवाही की शिकायत जिला विकास आयुक्त (DDC) से भी की है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह विधानसभा क्षेत्र का जब यह हाल है, तो राज्य के बाकी दूर-दराज के क्षेत्रों की स्थिति की दुर्दशा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ फूटा जन-आक्रोश: पानी टंकी के सामने प्रदर्शन

भीषण गर्मी और उमस के बीच जब पेयजल संकट को लेकर स्थानीय विभाग ने कोई सुध नहीं ली, तो गुरुवार को ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। लगातार बनी हुई समस्या और प्रशासनिक उदासीनता से नाराज गांव के दर्जनों लोगों ने पानी टंकी के सामने इकट्ठा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

जल्द बहाली की मांग: ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से गांव में जलापूर्ति तुरंत बहाल करने की मांग की।

अनसुनी रहीं शिकायतें: मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे इस गंभीर किल्लत को लेकर कई बार संबंधित विभाग के चक्कर काट चुके हैं और लिखित शिकायतें भी दे चुके हैं, लेकिन अब तक अधिकारियों ने समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

 झारखंड से बुलाए गए कारीगर, विभाग ने दिया आश्वासन

लगातार बढ़ते जन-आक्रोश और विरोध प्रदर्शन के बाद अब लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) हरकत में आता दिख रहा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पीएचईडी के एसडीओ (SDO) तपेश्वर साफी ने बताया:

सोनरवा गांव में जलापूर्ति की व्यवस्था सोलर पैनल प्रणाली पर आधारित है।

सिस्टम में कुछ बड़ी तकनीकी खराबी आ गई है, जिसे स्थानीय स्तर पर ठीक नहीं किया जा सका।

इस खराबी को दूर करने के लिए विशेष रूप से झारखंड के रांची से तकनीकी विशेषज्ञों (मिस्त्री) को बुलाया गया है।

विभाग ने दावा किया है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर तकनीकी खामी को दुरुस्त कर गांव में पानी की सप्लाई दोबारा सुचारू रूप से बहाल कर दी जाएगी।

अब देखना यह होगा कि विभाग का यह आश्वासन तय समय पर पूरा होता है या ग्रामीणों को इस जानलेवा गर्मी में नदी के पानी के भरोसे ही दिन काटने पड़ेंगे।

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