मां बनना गुनाह नहीं! विनेश फोगाट पर बैन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की कुश्ती संघ को कड़ी फटकार

अदालत ने कहा— बदले की भावना से काम न करे फेडरेशन; केंद्र को विनेश का मूल्यांकन कर एशियन गेम्स ट्रायल सुनिश्चित करने का आदेश।

22 May 2026  |  99

 

 

नई दिल्ली। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय कुश्ती संघ (WFI) को जबरदस्त फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्टार पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू स्पर्धाओं (इवेंट्स) में भाग लेने से अयोग्य घोषित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फेडरेशन को किसी भी एथलीट के खिलाफ बदले की भावना से काम नहीं करना चाहिए।

इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को तत्काल एक विशेषज्ञ पैनल (समिति) गठित करने का निर्देश दिया है, जो विनेश फोगाट की खेल पात्रता का निष्पक्ष मूल्यांकन करेगा।

'मां बनने का जश्न मनाया जाता है, यह कोई अपराध नहीं'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने बेहद संवेदनशील और तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कुश्ती संघ के अड़ियल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा:

"हमारे देश के समाज और संस्कृति में मां बनने (मैटरनिटी) को एक उत्सव की तरह सेलिब्रेट किया जाता है, यह कोई गुनाह नहीं है। कुश्ती संघ पहले जिस तरह से देश के प्रतिष्ठित एथलीट्स को सीधे भाग लेने की अनुमति देता आया है, उस पुरानी प्रथा से अब अचानक पीछे हटना बहुत कुछ बयां करता है।"

एशियन गेम्स ट्रायल का रास्ता साफ करने के निर्देश

पहलवान विनेश फोगाट मैटरनिटी लीव (मतृत्व अवकाश) के बाद अब मैट पर वापसी कर आगामी एशियन गेम्स के ट्रायल्स में हिस्सा लेना चाहती हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि विनेश के इस अधिकार में कोई बाधा न आए।

केंद्र बनाएगा विशेषज्ञ पैनल, खेल पात्रता पर देगा छूट

सुनवाई के दौरान जब सरकार के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नियमों और ढांचे में विशेष मामलों के अंतर्गत 'पात्रता मानदंडों' (Eligibility Criteria) में छूट देने का प्रावधान है, तो कोर्ट ने इस पर तुरंत मुहर लगा दी।

कोर्ट का आदेश: केंद्र सरकार तुरंत एक विशेषज्ञ पैनल का गठन करे।

पैनल का कार्य: यह पैनल विनेश फोगाट की फिटनेस और मौजूदा प्रदर्शन का तकनीकी मूल्यांकन करेगा ताकि वे देश के लिए दोबारा खेल सकें।

अंतिम संदेश: दिल्ली हाईकोर्ट के इस सख्त और मानवीय फैसले ने न सिर्फ विनेश फोगाट की खेल में वापसी की उम्मीदों को जिंदा रखा है, बल्कि देश की उन तमाम महिला एथलीट्स को एक नया हौसला दिया है जो मातृत्व के बाद दोबारा खेल के मैदान में अपना परचम लहराना चाहती हैं।

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