तमिलनाडु में 'नारियल के पेड़' पर छिड़ा सियासी घमासान; DMK, VCK और TVK के बीच जुबानी जंग तेज

द्रविड़ राजनीति में भूचाल: DMK के 'धोखे' वाले तंज पर भड़की VCK और TVK; 59 साल का एकाधिकार टूटने के बाद जुबानी तीर हुए और तीखे।

22 May 2026  |  67

 

चेन्नई। तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में आया भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को सत्ता के नए समीकरणों के बीच सत्तारूढ़ रही डीएमके (DMK) और उसकी पूर्व सहयोगी पार्टी वीसीके (VCK) के बीच काव्यात्मक और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वहीं, अभिनेता से राजनेता बने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) भी अपने नए सहयोगी के बचाव में पूरी आक्रामकता के साथ उतर आई है।

इस सियासी ड्रामे ने उस समय तूल पकड़ लिया जब डीएमके के पूर्व सहयोगी दलों (VCK और IUML) ने नवगठित TVK सरकार में शामिल होने और कैबिनेट का हिस्सा बनने का फैसला कर लिया।

DMK का तंज: 'पड़ोसी के घर झुका हुआ टेढ़ा नारियल का पेड़'

विवाद की शुरुआत डीएमके सांसद ए. राजा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट से हुई। उन्होंने शास्त्रीय तमिल साहित्य के एक रूपक (मेटाफर) 'मुट्टत्थेंगू' यानी टेढ़े नारियल के पेड़ का जिक्र करते हुए VCK पर सीधा निशाना साधा।

क्या है रूपक का मतलब: ऐसा पेड़ जो बोया तो अपनी जमीन पर जाता है, लेकिन झुककर अपने फल और पानी पड़ोसी की जमीन पर गिरा देता है।

DMK का आरोप: राजा का इशारा साफ था कि VCK ने चुनाव तो डीएमके गठबंधन की बदौलत जीता, लेकिन मलाई खाने वे TVK की सरकार में चले गए। राजा ने एक अन्य ट्वीट में पेरियार का हवाला दिया और एक बेहद विवादित टिप्पणी करते हुए इस पालाबदल की तुलना पति को धोखा देने वाली महिला से कर दी।

VCK का तीखा पलटवार: "शोषितों को सत्ता मिलने से इतनी जलन क्यों?"

DMK के इस तीखे प्रहार का जवाब देने में VCK (पूर्व में दलित पैंथर्स ऑफ इंडिया) ने भी देर नहीं की। तिरुपोरूर सीट से विधायक और वीसीके नेता एसएस बालाजी ने तमिल कविता के जरिए पलटवार करते हुए पूछा कि शोषित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के सत्ता में आने से डीएमके आखिर क्यों परेशान है? उन्होंने काव्यात्मक लहजे में लिखा:

"विनम्र लोगों को सत्ता मिलना... इसमें इतना गुस्सा क्यों है? असभ्य लोगों से बचने के लिए इसे शांति से पार करें। अगर अन्याय जारी रहता है और आप इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, और अगर आप लपटों को रोक नहीं पाते हैं, तो आप जल जाएंगे..."

नए सहयोगी के बचाव में उतरी TVK; कहा— 'अहंकार में आपा खो बैठी है DMK'

इस विवाद में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK ने लंबी पोस्ट साझा कर डीएमके को 'राजनीतिक मर्यादा' की याद दिलाई। TVK ने कहा कि सत्ता में हिस्सेदारी के लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर राजा की टिप्पणी अशिष्टता की चरम सीमा है।

पार्टी के आईटी सेल ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:

"TVK की सत्ता-साझेदारी की ईमानदार राजनीति से डीएमके बुरी तरह डर गई है। उन्हें साफ दिख रहा है कि उनका परिवार-केंद्रित राजनीतिक एकाधिकार अब खत्म होने जा रहा है, इसीलिए वे अपना आपा खोकर बेतुकी बातें कर रहे हैं।"

क्यों मची है यह काव्यात्मक रार? (सियासी समीकरण)

दरअसल, हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव ने राज्य के 59 साल पुराने द्रविड़ एकाधिकार (DMK और AIADMK का वर्चस्व) को उखाड़ फेंका है। 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की पार्टी TVK ने अकेले 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।

बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से 10 सीट दूर रही TVK को कांग्रेस (5 सीट) के अलावा सरकार चलाने के लिए सहयोगियों की जरूरत थी। चार दिनों के भारी सस्पेंस के बाद आखिरकार VCK और आईयूएमएल (IUML) ने न केवल विजय को समर्थन दिया, बल्कि वे सरकार में भी शामिल हो गए। पूर्व सहयोगियों की इसी 'घरवापसी' और सत्ता में हिस्सेदारी ने डीएमके की नाराजगी और इस तीखी जुबानी जंग को जन्म दिया है।

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