आईटी सेक्टर में महा-गिरावट: ₹18 लाख करोड़ स्वाहा, ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचे भारतीय दिग्गजों के शेयर

ग्लोबल क्राइसिस के बाद सबसे बड़ा भूचाल! टीसीएस 50% तो इंफोसिस 45% टूटा; क्या यह संशय का दौर है या समझदार निवेशकों के लिए 'करो या मरो' का मौका?

22 May 2026  |  62

 

मुंबई / बेंगलुरु। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्चों में भारी कटौती और अमेरिका-यूरोप में आर्थिक मंदी की आहट ने भारतीय आईटी (IT) सेक्टर की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। इस अभूतपूर्व संकट के चलते भारत की टॉप 10 डिजिटल और टेक्नोलॉजी सर्विस एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) से लगभग ₹17.6 लाख करोड़ से ₹18 लाख करोड़ साफ हो चुके हैं।

यह गिरावट इस कदर ऐतिहासिक है कि आईटी सेक्टर का वैल्यूएशन अब उस स्तर पर पहुंच गया है, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट (Global Financial Crisis) के बाद कभी नहीं देखा गया।

निफ्टी IT इंडेक्स में भारी गिरावट, दिग्गजों के छूटे पसीने

जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Gen AI) को लेकर पैदा हुए संशय, क्लाइंट्स द्वारा विवेकाधीन खर्चों (Discretionary Spends) में की गई कटौती और कमाई की धीमी रफ्तार के कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स 13 दिसंबर, 2024 के अपने उच्चतम स्तर (46,089) से लगभग 41% फिसलकर 14 मई, 2026 को 27,078 के निचले स्तर पर आ गया।

कंपनी का नामशेयरों में आई गिरावटमार्केट कैप को लगा झटका
TCS~50%अकेले ₹8 लाख करोड़ से ज्यादा स्वाहा
Infosys~45%बाजार मूल्य में भारी गिरावट
HCLTech / LTIMindtree~40%निवेशकों को बड़ा नुकसान
Wipro / Mphasis / Coforge~30% से अधिकलगातार बिकवाली का दबाव

 

नोट: इंडेक्स की बाकी सभी छोटी-बड़ी कंपनियां भी अपने ऊंचे स्तरों से कम से कम 25% नीचे कारोबार कर रही हैं।

क्या गिरावट थम गई है? बाजार की 'उलट-सोच' (Contrarian Approach)

फरवरी और मार्च के महीनों में क्रमशः 20% और 5% की भारी गिरावट झेलने के बाद अब आईटी इंडेक्स में स्थिरता के कुछ शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। अप्रैल में इसमें 1% की मामूली बढ़त देखी गई, जबकि मई में अब तक 1% की हल्की गिरावट दर्ज हुई है।

इस मंदी के कारण म्यूचुअल फंड्स ने भी इस सेक्टर से दूरी बनाई, जिससे अप्रैल में उनके पोर्टफोलियो में आईटी का हिस्सा 8 साल के निचले स्तर (6.7%) पर आ गया। हालांकि, बाजार के दिग्गज फंड मैनेजर इसे एक "उलट-सोच वाला बेहतरीन मौका" (Contrarian Opportunity) मान रहे हैं:

PPFAS म्यूचुअल फंड: दिग्गज फंड मैनेजर राजीव ठक्कर के नेतृत्व में इस फंड हाउस ने बाजार की आम सोच के विपरीत जाकर अप्रैल में टेक सेक्टर में अपना निवेश 1.2% बढ़ाकर 12.2 फीसदी कर दिया।

ICICI प्रूडेंशियल: ग्रो इंडिया इन्वेस्टर फेस्टिवल 2026 में शंकरन नरेन ने माना कि मौजूदा वैल्यूएशन बेहद आकर्षक हैं, भले ही एआई (AI) का जोखिम बना हुआ है।

AI का खतरा: क्या पारंपरिक बिजनेस मॉडल खोखला हो रहा है?

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सिद्धार्थ टिपनीस के अनुसार, यह संकट केवल मंदी का नहीं बल्कि एक ढांचागत बदलाव (Structural Shift) का है। जनरेटिव एआई पारंपरिक आईटी मॉडल को बदल रहा है।

"ग्लोबल क्लाइंट्स अब 'आपूर्ति किए गए लोगों' (इंजीनियरों की संख्या) के बजाय सीधे 'प्राप्त परिणामों' (Outcomes) के आधार पर भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में जूनियर एप्लिकेशन डेवलपमेंट, टेस्टिंग (QA) और एल1/एल2 सपोर्ट जैसी कमोडिटी भूमिकाओं पर सबसे ज्यादा खतरा और प्राइजिंग प्रेशर है।"

कम समय का दर्द, लंबे समय का बड़ा अवसर

इस संशय के बीच नुवामा (Nuvama) के विश्लेषक विभोर सिंघल एक सकारात्मक रुख रखते हैं। उनका मानना है कि आईटी कंपनियां अभी जेनरेशन एआई के कारण रेवेन्यू में शॉर्ट-टर्म रिडक्शन (अस्थायी कमी) का सामना कर रही हैं, लेकिन 2030 तक यही तकनीक कुल संभावित बाजार (TAM) को 300 से 400 अरब डॉलर तक बढ़ा देगी।

सिंघल ने इतिहास की तुलना करते हुए कहा:

"यह कोई अस्तित्व का संकट नहीं है। साल 2016-17 में भी ऐसा ही तकनीकी संशय देखा गया था, जिससे भारतीय कंपनियां मजबूती से उभरी थीं। वर्तमान में कंपनियों के पास नए सौदे (Deal Pipeline) अच्छे हैं, बस क्लाइंट्स फैसले लेने में थोड़ा वक्त ले रहे हैं। मध्यम से लंबी अवधि के लिए यह सेक्टर बेहद आकर्षक है।"

निष्कर्ष: भारतीय आईटी उद्योग इस समय एक बड़े चौराहे पर खड़ा है। कमजोर होते रुपये ने डॉलर रेवेन्यू को सहारा देकर थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन इस सेक्टर की परमानेंट री-रेटिंग तभी संभव होगी जब वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च फिर से शुरू होंगे और एआई से होने वाली कमाई की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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