कंगाली में आटा गीला: UAE ने 2000 पाकिस्तानियों को जबरन निकाला, पैसे और सामान भी किए जब्त !

ईरान जंग के बीच पाकिस्तान को खाड़ी देश का डबल झटका; कर्ज वापसी के बाद अब नागरिकों पर गिरी गाज!

22 May 2026  |  65

 

इस्लामाबाद: आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ईरान के साथ जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को एक और तगड़ा झटका दिया है। यूएई ने अपने यहाँ रह रहे 2000 पाकिस्तानियों को जबरन डिपोर्ट (निर्वासित) कर देश से बाहर निकाल दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन नागरिकों के पैसे और सामान भी यूएई प्रशासन द्वारा जब्त किए जाने की खबरें हैं।

इस घटना के बाद पाकिस्तान के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने शहबाज शरीफ सरकार को चौतरफा घेरा, जिसके बाद सरकार को मजबूरन इस मामले की जांच विदेश मामलों की कमेटी को सौंपनी पड़ी।

संसद में विपक्ष का हंगामा और सरकार की दलील

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने संसद में आरोप लगाया कि यूएई से भगाए गए निर्दोष पाकिस्तानियों पर पहले वहां अत्याचार किया गया और फिर उन्हें खाली हाथ वतन वापस भेज दिया गया।

विवाद बढ़ता देख पाकिस्तान के विदेश विभाग ने संसद में सफाई पेश करते हुए इसके पीछे कई चौंकाने वाली वजहें बताई हैं:

अपराध और भीख मांगना: सरकार के मुताबिक, जिन लोगों को निकाला गया है उनमें से कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे या फिर यूएई में भीख मांगते पकड़े गए थे।

जासूसी का डर: 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूएई को डर है कि उसके यहाँ काम कर रहे पाकिस्तानी (विशेषकर शिया समुदाय) क्षेत्रीय तनाव के बीच जासूसी कर सकते हैं।

बड़ा आंकड़ा: सरकार ने माना कि पिछले 5 साल में 1 लाख 64 हजार पाकिस्तानियों को अरब देशों से निकाला गया है, जिसमें से अकेले सऊदी अरब ने 1 लाख और यूएई ने 64 हजार लोगों को डिपोर्ट किया है।

आखिर क्यों बिगड़े यूएई और पाकिस्तान के रिश्ते?

कभी पाकिस्तान का सबसे पक्का मददगार माना जाने वाला यूएई आज इस्लामाबाद से बेहद नाराज है। इस कड़वाहट के पीछे मुख्य रूप से दो रणनीतिक कारण सामने आ रहे हैं:

सऊदी अरब का पक्ष लेना: ईरान युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने सऊदी अरब को खुलकर सैन्य सहायता देने की घोषणा की, लेकिन यूएई को लेकर कोई ठोस स्टैंड नहीं लिया।

एकतरफा मध्यस्थता की कोशिश: पाकिस्तान ने जब इस जंग में सीजफायर (युद्धविराम) कराने की पहल की, तो उसने यूएई को भरोसे में नहीं लिया। अबू धाबी को पाकिस्तान का यह रवैया बेहद नागवार गुजरा।

कर्ज वापसी का दबाव: इसी नाराजगी के चलते यूएई ने हाल ही में पाकिस्तान को दिया गया अपना कर्ज तुरंत वापस मांग लिया था। हालांकि, पाकिस्तान ने किसी तरह सऊदी अरब से मदद लेकर यूएई का कर्ज तो चुका दिया, लेकिन रिश्तों की दरार कम नहीं हुई।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर

यूएई में वर्तमान में करीब 20 लाख पाकिस्तानी काम करते हैं। ये कामगार हर साल 8 अरब डॉलर (विदेशी मुद्रा) कमाकर पाकिस्तान भेजते हैं, जो पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम करती है। अब यूएई अपने यहाँ पाकिस्तानी कामगारों की संख्या को धीरे-धीरे कम करना चाहता है, जो भविष्य में पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ी आर्थिक तबाही का सबब बन सकता है।

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