मौसम की मार: कश्मीर में चेरी के उत्पादन में 50 फीसदी तक की भारी गिरावट, बेमौसम बारिश और गर्मी ने बिगाड़ा खेल

फूल आने के समय मौसम के उतार-चढ़ाव से फसलों को भारी नुकसान; बाजार में स्थिर कीमतों से बागवानों को मिली थोड़ी राहत!

22 May 2026  |  65

 

श्रीनगर: कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध चेरी बागवानों के लिए यह सीजन बेहद मायूस करने वाला साबित हो रहा है। इस साल मौसम के मिजाज में आए अप्रत्याशित बदलाव के कारण कश्मीर में चेरी के उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसानों और कृषि उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, बेमौसम और अनियमित मौसम इस बार फसलों की बर्बादी का मुख्य कारण बना है।

फूल आने के समय बिगड़ा मौसम का मिजाज

चेरी उत्पादकों (बागवानों) का कहना है कि इस साल फसल चक्र के बेहद संवेदनशील समय यानी 'फ्लावरिंग' (फूल आने) और 'फ्रूट-सेटिंग' (फल बनने) के दौरान मौसम ने अचानक करवट ली।

पहले सामान्य से कहीं अधिक तापमान (गर्मी) दर्ज की गई।

इसके ठीक बाद रुक-रुक कर हुई बेमौसम बारिश ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

इस प्रतिकूल मौसम के कारण चेरी के फूलों और फलों के विकास पर बेहद बुरा असर पड़ा, जिससे पूरी घाटी के प्रमुख चेरी उत्पादक क्षेत्रों में इस बार उपज बेहद कम और छोटे आकार की हुई है।

स्थिर कीमतों से मिला आंशिक सहारा

हालांकि, उत्पादन में इस भारी गिरावट के बावजूद कश्मीर के बागवानों के लिए राहत की एक छोटी सी खबर बाजार से आ रही है। मांग और आपूर्ति के इस संकट के बीच:

बाजार का रुख: उत्पादकों ने बताया कि चेरी की बाजार कीमतें फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। कीमतों में इस स्थिरता ने भारी नुकसान झेल रहे बागवानों और ऑर्बर्डिस्ट्स (बागान मालिकों) को एक हद तक आर्थिक संबल और थोड़ी राहत जरूर पहुंचाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कश्मीरी चेरी की इस कम पैदावार का असर देश के अन्य राज्यों की मंडियों में इसकी उपलब्धता पर भी देखने को मिल सकता है।

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