डिजिटल दुनिया में बच्चे असुरक्षित: ब्रिटेन में YouTube और TikTok रेगुलेटर के निशाने पर, खतरनाक एल्गोरिद्म को लेकर बड़ी चेतावनी

बार-बार चेतावनी के बाद भी कंपनियों ने नहीं बदले तौर-तरीके; भारत के लिए भी बजा खतरे का अलार्म, बिना एज-वेरिफिकेशन ऐप चला रहे हैं करोड़ों मासूम!

22 May 2026  |  110

 

लंदन: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा को लेकर ब्रिटेन की मीडिया रेगुलेटर संस्था ऑफकॉम (Ofcom) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। ऑफकॉम ने दुनिया के दो सबसे बड़े वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म्स— TikTok और गूगल के स्वामित्व वाले YouTube की कड़ी आलोचना की है। रेगुलेटर का सीधा आरोप है कि दोनों कंपनियों ने बच्चों को खतरनाक, हिंसक और नुकसानदेह ऑनलाइन कंटेंट से बचाने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।

सबसे ज्यादा चिंता इन प्लेटफॉर्म्स के 'सिफारिशी एल्गोरिद्म' (Recommendation Algorithms) को लेकर जताई गई है, जो बच्चों को लगातार ऐसा कंटेंट परोसते रहते हैं जो उनकी मानसिक सुरक्षा, सोच और व्यवहार पर बेहद बुरा असर डाल सकता है।

चेतावनियों को किया नजरअंदाज, धड़ल्ले से परोसा जा रहा हिंसक कंटेंट

Ofcom की रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से मिल रही चेतावनियों के बावजूद YouTube और TikTok ने अपने सिस्टम में कोई बड़ा या प्रभावी बदलाव लागू नहीं किया। नतीजतन, बच्चों तक हिंसक, भ्रामक (Fake News) और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला कंटेंट आसानी से पहुंच रहा है।

YouTube का बचाव: आलोचनाओं के घिरने के बाद यूट्यूब ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह बच्चों को उम्र के हिसाब से उपयुक्त अनुभव देने वाला अग्रणी प्लेटफॉर्म है और वह चाइल्ड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है।

TikTok की नाराजगी: टिकटॉक ने ऑफकॉम की टिप्पणियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रेगुलेटर ने उनके नए सुरक्षा फीचर्स को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है।

Meta, Snapchat और Roblox ने उठाए सख्त कदम

यह मामला इसलिए और ज्यादा गंभीर हो गया है क्योंकि टेक जगत की अन्य बड़ी कंपनियों ने ब्रिटेन के कड़े नियमों को अपनाना शुरू कर दिया है:

Meta: किशोर यूजर्स (Teenagers) के अकाउंट्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कंट्रोल जोड़ रही है और संदिग्ध चैट्स को पकड़ने के लिए एडवांस AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही है।

Snapchat (Snap): अब डिफॉल्ट रूप से कोई भी अजनबी वयस्क (Adult) सीधे बच्चों से संपर्क या मैसेज नहीं कर पाएगा।

Roblox: 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए माता-पिता (Parents) को डायरेक्ट मैसेजिंग फीचर बंद करने का अधिकार दे दिया है।

ब्रिटेन के चौंकाने वाले आंकड़े

Ofcom की रिपोर्ट में बच्चों की सोशल मीडिया लत को लेकर डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। ब्रिटेन में लगभग 67% बच्चे YouTube और करीब 60% बच्चे TikTok पर सक्रिय हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि 8 से 12 साल की उम्र के लगभग 84% बच्चे उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं, जहां अकाउंट बनाने की आधिकारिक न्यूनतम उम्र 13 साल तय की गई है।

भारत के लिए 'वेक-अप कॉल': बिना उम्र जांच के रील्स देख रहे हैं करोड़ों बच्चे

ब्रिटेन की यह चेतावनी भारत के लिए एक बड़े खतरे का संकेत है, क्योंकि भारत में स्थिति इससे भी ज्यादा संवेदनशील है। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉट्स और फेसबुक पर रोजाना करोड़ों भारतीय बच्चे एक्टिव रहते हैं।

सुरक्षा में बड़ी सेंध: भारत में सबसे बड़ी समस्या 'एज वेरिफिकेशन' (उम्र की सही जांच) का न होना है। बच्चे आसानी से गलत जन्मतिथि दर्ज करके अकाउंट बना लेते हैं। इसके बाद उन्हें ऐसा कंटेंट दिखने लगता है जो उनके कोमल दिमाग के लिए बिल्कुल सुरक्षित नहीं होता। इसके अलावा, इन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों को ऑनलाइन प्रताड़ित करने वाले (Cyberbullies) और उनका पीछा करने वाले (Stalkers) भी सक्रिय रहते हैं।

दुनिया ने उठाए कदम, भारत को भी सख्त कानून की जरूरत

ऑनलाइन खतरों को देखते हुए दुनिया के कई देशों ने कड़े फैसले लिए हैं:

ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

यूरोपीय संघ (EU): बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए विशेष एज-वेरिफिकेशन ऐप्स की शुरुआत की है।

भारत में भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और सख्त सोशल मीडिया नियमों पर बहस तो तेज हो गई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कानूनी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने समय रहते मजबूत तकनीकी नियम और कड़े कानून लागू नहीं किए, तो आने वाले समय में बच्चों की मानसिक और ऑनलाइन सुरक्षा देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाएगी।

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