नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से तहलका मचाने वाले व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान 'कॉकरोच जनता पार्टी' के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की खबर सामने आई है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उनका निजी इंस्टाग्राम अकाउंट, पार्टी का आधिकारिक पेज और ट्विटर (X) समेत अन्य सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स या तो हैक कर लिए गए हैं या उन्हें बंद (सस्पेंड) कर दिया गया है।
सोशल मीडिया पर लिखा— 'हमारे नाम पर होने वाले पोस्ट से रहें सावधान'
अभिजीत दिपके ने अन्य माध्यमों से अपनी बात रखते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:
"कॉकरोच जनता पार्टी पर कार्रवाई की जा रही है। इंस्टाग्राम पेज हैक हो गया है और मेरा निजी इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कर लिया गया है। हमारा ट्विटर अकाउंट रोक दिया गया है और बैकअप अकाउंट भी हटा दिया गया है। फिलहाल हमारे किसी भी प्लेटफॉर्म तक हमारी पहुंच नहीं है। इसके बाद (अकाउंट्स बहाल होने तक) किए गए किसी भी पोस्ट को कॉकरोच जनता पार्टी का आधिकारिक बयान न माना जाए।"
महज एक हफ्ते में बटोरे 1.9 करोड़ फॉलोअर्स
बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व सहयोगी अभिजीत दिपके ने करीब एक सप्ताह पहले ही इस अनूठे डिजिटल अभियान की शुरुआत की थी।
युवाओं का मिला साथ: बहुत कम समय में यह प्लेटफॉर्म युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, बंद होने से पहले इस पेज के इंस्टाग्राम पर करीब 1.9 करोड़ फॉलोअर्स हो चुके थे।
क्या था एजेंडा?: इस प्लेटफॉर्म पर 'कॉकरोच' को चुनाव चिन्ह बनाकर मीम्स, ग्राफिक्स और राजनीतिक टिप्पणियों के जरिए देश में बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और लचर शिक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों को व्यंग्यात्मक घोषणापत्र की शैली में उठाया जा रहा था। दिपके ने इस आंदोलन को 'आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज' नाम दिया था।
कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का ट्रेंड?
इस अनोखी पार्टी के वजूद में आने की कहानी देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी से जुड़ी है:
विवाद की पृष्ठभूमि: वरिष्ठ वकील का दर्जा देने से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट में कथित तौर पर 'परजीवी' और 'कॉकरोच' जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ था, जिससे प्रेरित होकर अभिजीत ने यह अभियान शुरू किया।
मुख्य न्यायाधीश की सफाई: हालांकि, बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उनकी टिप्पणी केवल उन लोगों के लिए थी जो फर्जी और गलत डिग्री लेकर वकालत के पेशे में आ जाते हैं।
पहले मिल चुकी हैं जान से मारने की धमकियां
अकाउंट्स बंद होने से पहले भी इस अभियान को लेकर काफी विवाद हुआ था। अभिजीत दिपके ने हाल ही में व्हाट्सऐप पर मिले कुछ कथित धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा किए थे, जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। दिपके का आरोप था कि संदेश भेजने वाले अज्ञात व्यक्ति ने उन पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का अकाउंट तुरंत बंद करने या फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का भारी दबाव बनाया था। फिलहाल, इन प्लेटफॉर्म्स के अचानक गायब होने से सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।