विशेष संवाददाता, नई दिल्ली/इस्लामाबाद पाकिस्तान का 'आतंकवादी फैक्ट्री' होने का सच एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। भारत के सबसे वांछित (Most Wanted) आतंकवादियों की फेहरिस्त में शामिल और 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान उर्फ 'डॉक्टर' को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में खुलेआम दफनाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस दौरान कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए न केवल खूंखार आतंकी संगठनों के सरगना, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के शीर्ष अधिकारी भी आधिकारिक तौर पर मौजूद रहे।
हथियारों की नुमाइश और आतंकियों का जमावड़ा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और स्थानीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, हमजा बुरहान के जनाजे में भारी हथियारों से लैस प्रतिबंधित संगठनों के गुर्गे नजर आए। खुलेआम AK-47 राइफलें और आधुनिक हथियार लहराए गए।
इस जनाजे में भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले कई बड़े आतंकी चेहरे एक साथ देखे गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
सैयद सलाहुद्दीन (सरगना, हिजबुल मुजाहिदीन)
बख्त जमीन खान (प्रमुख, अल-बद्र)
बड़ा सवाल: एक घोषित वैश्विक आतंकवादी के जनाजे में ISI के अधिकारियों की मौजूदगी और राजधानी इस्लामाबाद में अत्याधुनिक हथियारों का यह खुला प्रदर्शन साबित करता है कि पाकिस्तान में आतंकवादियों को आज भी 'स्टेट गेस्ट' (सरकारी मेहमान) जैसा संरक्षण हासिल है।
PoK में 'प्रिंसिपल' बनकर छिपा था 'डॉक्टर'
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान (कोडनेम- डॉक्टर) जम्मू-कश्मीर में कई बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम देने के बाद पाकिस्तान भाग गया था। साल 2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था।
हाल के वर्षों में वह अपनी पहचान छिपाकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में रह रहा था। वह वहां एक प्राइवेट कॉलेज के प्रिंसिपल के तौर पर काम कर रहा था और इसी की आड़ में 'अल-बद्र' संगठन के लिए युवाओं का ब्रेनवॉश करने, कट्टरपंथ फैलाने और टेरर फंडिंग (आतंकी वित्तपोषण) का नेटवर्क चला रहा था।
अज्ञात बंदूकधारियों ने सिर में मारी गोली
स्थानीय पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह जब बुरहान मुजफ्फराबाद में कॉलेज परिसर से बाहर निकला, तभी घात लगाकर बैठे अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे घेर लिया। हमलावरों ने बेहद करीब से उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। उसके सिर में कई गोलियां लगीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलवामा हमले का था मुख्य गुनहगार
हमजा बुरहान फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर हुए उस भीषण आत्मघाती हमले की साजिश रचने वालों में से एक था, जिसमें भारत के 40 से अधिक वीर जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं।
पाकिस्तान का पुराना 'पैटर्न'
यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की सेना और सरकार का आतंकियों के प्रति प्रेम खुलकर सामने आया हो। इससे पहले मई 2025 में भी, भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मारे गए आतंकवादियों के जनाजों में पाकिस्तानी सेना के उच्च अधिकारियों, सिविल नौकरशाहों और बड़े आतंकी सरगनाओं को एक साथ मातम मनाते देखा गया था।
ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करता है।