बिहार: पाला बदलने वाले 7 विधायकों को 'माया' तो मिली पर 'माधव' नहीं; मंत्री पद की साध रह गई अधूरी

"बंगला, गाड़ी और गार्ड की मिली सौगात, लेकिन कैबिनेट में जगह की आस पर फिर फिरा पानी; सरकार बदली पर नहीं बदला विधायकों का नसीब।"

23 May 2026  |  119

 

 

राजनैतिक ब्यूरो, पटना बिहार की सियासत में 'वफादारी बदलने' का इनाम तो मिलता है, लेकिन वह इनाम हमेशा मनमुताबिक हो, ऐसा जरूरी नहीं। दो साल पहले पाला बदलकर एनडीए सरकार को संजीवनी देने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के सात विधायकों की कहानी कुछ ऐसी ही है। इन विधायकों को सरकार ने बंगला, गाड़ी और सरकारी सेवक जैसी 'माया' (सुविधाएं) तो दे दी हैं, लेकिन नीतीश कुमार से लेकर सम्राट चौधरी कैबिनेट तक, किसी के भी मंत्रिमंडल में इन्हें जगह (माधव) नहीं मिल पाई है।

विश्वास मत का मिला सिला, पर कसक बाकी

मामला फरवरी 2024 का है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया था। उस वक्त विपक्ष के सात विधायकों ने बगावत कर सरकार के पक्ष में मतदान किया था। उम्मीद थी कि इस वफादारी के बदले इन्हें कैबिनेट मंत्री की कुर्सी मिलेगी।

हालांकि, विश्वास मत के अगले ही महीने यानी मार्च 2024 में सरकार ने इन्हें राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का सदस्य बनाकर 'उप मंत्री' का दर्जा दे दिया। हाल ही में बिहार में सरकार बदली और सम्राट चौधरी सूबे के नए मुखिया बने, लेकिन सरकार के ताजा आदेश में भी इन विधायकों का पुराना दर्जा ही बरकरार रखा गया है।

एनडीए के टिकट पर जीते, पर कैबिनेट से रहे दूर

पाला बदलने वाले इन सात विधायकों में राजद के चेतन आनंद, नीलम देवी, संगीता कुमारी, प्रह्लाद यादव, भरत बिन्द और कांग्रेस के सिद्धार्थ सौरव व मुरारी प्रसाद गौतम शामिल थे।

टिकट और जीत: 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रह्लाद यादव और नीलम देवी को छोड़कर एनडीए ने बाकी सभी को टिकट दिया। (नीलम देवी की जगह उनके पति अनंत सिंह को टिकट मिला)।

नतीजा: ये सभी चुनाव जीतकर विधानसभा तो पहुंच गए, लेकिन कैबिनेट का दरवाजा इनके लिए इस बार भी बंद ही रहा।

क्या मिल रहा है और क्या नहीं: राज्यस्तरीय समिति के सदस्य के रूप में इन्हें पटना में आलीशान बंगला, चमचमाती सरकारी गाड़ी, सुरक्षा के लिए गार्ड और निजी स्टाफ (सरकारी सेवक) मिलेंगे। लेकिन, एक पूर्ण कैबिनेट मंत्री वाला रूतबा, अधिकार और तामझाम इनसे दूर रहेगा।

कोई दिल्ली में लगा रहा था दौड़, तो किसी के लिए कयासों का बाजार था गर्म

इस साल 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, तब सोशल मीडिया पर कयासों का दौर चरम पर था।

संगीता कुमारी: इंटरनेट मीडिया पर उन्हें मुख्यमंत्री पद तक की दौड़ में आगे बताया जा रहा था। इस उम्मीद में वह स्वयं नई दिल्ली में डेरा डाले बैठी थीं।

चेतन आनंद: कयास लगाए जा रहे थे कि आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को कोई भारी-भरकम मंत्रालय सौंपा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में उनके मंत्री बनने की चर्चाएं अब भी थमी नहीं हैं।

संगठनात्मक फेरबदल: ललन मंडल का डिमोशन, संजय सर्राफ को राज्यमंत्री का दर्जा

सरकार की इस नई अधिसूचना में केवल विधायकों की साध ही अधूरी नहीं रही, बल्कि कुछ अंदरूनी फेरबदल भी देखने को मिले हैं:

ललन मंडल पदावनत: भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष ललन कुमार मंडल को समिति में झटका लगा है। उन्हें उपाध्यक्ष पद से हटाकर अब महज एक सदस्य (डिमोशन) बना दिया गया है।

संजय सर्राफ को बड़ी जिम्मेदारी: ललन मंडल की जगह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सर्राफ को समिति का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिन्हें राज्यमंत्री का दर्जा और सुविधाएं मिलेंगी।

समिति की कमान:

नियमों के मुताबिक, मुख्यमंत्री इस राज्य स्तरीय समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं, जबकि उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को इस समिति का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। साफ है कि पाला बदलने वाले इन माननीय विधायकों को सुविधाओं का 'लॉलीपॉप' थमाकर फिलहाल शांत रहने का संदेश दे दिया गया है।

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