ईंधन की आग पर सियासी उबाल: 'सरकार किस्तों में लूट रही जनता की कमाई'— तेल की कीमतों पर खरगे का केंद्र पर तीखा हमला

"8 दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; मल्लिकार्जुन खरगे बोले- दुनिया दे रही राहत, भारत में रोजाना वसूला जा रहा 1,000 करोड़ का टैक्स।"

23 May 2026  |  115

 

 

राजनैतिक ब्यूरो, नई दिल्ली देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने एक बार फिर सियासी पारे को गरमा दिया है। महज आठ दिनों के भीतर ईंधन के दामों में तीसरी बार हुई वृद्धि को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार "किस्तों में आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट रही है।"

'एक्स' पर खरगे का वार: "देश में नेतृत्व का संकट"

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि इस समय देश 'नेतृत्व के संकट' से जूझ रहा है।

खरगे ने कहा, > "जब पश्चिम एशिया के हालातों के कारण दुनिया भर में युद्ध जैसी स्थिति बनी और कई देशों ने अपने नागरिकों को महंगाई से राहत दी, ठीक उसी वक्त भारत की भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर आम लोगों की जेब पर सीधा प्रहार कर रही है।"

रोजाना 1,000 करोड़ टैक्स की वसूली का दावा

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने दावों में सरकार की टैक्स नीति को आड़े हाथों लिया। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

टैक्स का भारी बोझ: देश के कई हिस्सों में पेट्रोल की कीमतें फिर से 100 रुपये प्रति लीटर के पार जा चुकी हैं। केंद्र सरकार कच्चे तेल के खेल में जनता को राहत देने के बजाय रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का टैक्स वसूल रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ नहीं: जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम थीं, तब भी सरकार ने उसका मुनाफा आम उपभोक्ताओं को ट्रांसफर नहीं किया, बल्कि एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरा।

चुनाव खत्म, त्याग शुरू: संकट के समय सरकार का शीर्ष नेतृत्व चुनावों में व्यस्त था और चुनाव खत्म होते ही जनता को महंगाई का "त्याग" करने का उपदेश दिया जा रहा है।

वैश्विक मंच का हवाला: दुनिया ने दी राहत, भारत में आफत!

मल्लिकार्जुन खरगे ने दुनिया के कई प्रमुख देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां की सरकारों ने संकट के समय नागरिकों का हाथ थामा:

देशसरकार द्वारा दी गई राहत
ऑस्ट्रेलियाटैक्स कम कर पेट्रोल की कीमतों में करीब 17 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की।
जर्मनीतेल पर टैक्स घटाकर कीमतों को 17 से 19 रुपये प्रति लीटर तक कम किया।
इटलीईंधन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को सीधे तौर पर घटाया।
ब्रिटेनपरिवारों को 100 पाउंड की नकद सहायता दी और बिजली-ईंधन पर टैक्स घटाए।
आयरलैंडविशेष राहत पैकेज के जरिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की।

 

खरगे ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा कि, "इस किस्तों वाली लूट में हिस्सा किस-किस को मिल रहा है? अब देश के 140 करोड़ नागरिक सरकार की इस नीयत को समझ चुके हैं।"

समझें कीमतों का गणित: 10 दिन में ₹5 तक महंगा हुआ तेल

शनिवार को सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी किए गए नए रेट कार्ड ने आम आदमी की चिंता सचमुच बढ़ा दी है:

शनिवार की बढ़ोतरी: पेट्रोल के दाम में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ।

19 मई: कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।

15 मई: पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में एकमुश्त 3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी हुई थी।

असर: पिछले महज दस दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से आने वाले दिनों में मालभाड़ा बढ़ेगा, जिससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं (सब्जी, दूध, राशन) की कीमतों में भी उछाल आने की पूरी आशंका है।

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