स्मार्टफोन बाजार में 'छंटनी का संकट': फीकी पड़ी चाइनीज ब्रांड्स की चमक, खर्च घटाने के लिए पूरी टीमें कीं साफ

"बाजार की सुस्ती और घटते मुनाफे की मार: वनप्लस और रियलमी जैसी दिग्गज कंपनियों में 15% तक नौकरियों की कटौती; कम कर्मचारियों से ज्यादा काम कराने की रणनीति।"

23 May 2026  |  85

 

 

आर्थिक ब्यूरो, नई दिल्ली

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में एक दौर था जब चीनी कंपनियों (Chines Brands) का एकछत्र राज था। शाओमी, वनप्लस और रियलमी जैसी कंपनियां हर महीने बिक्री के नए रिकॉर्ड बना रही थीं, लेकिन अब वक्त बदल चुका है। बाजार में छाई सुस्ती, बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के कारण इन कंपनियों पर खर्च कम करने का भारी दबाव है। नतीजा यह है कि स्मार्टफोन कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। सबसे ज्यादा गाज मार्केटिंग, ऑफलाइन एक्सपेंशन और सेल्स टीमों पर गिरी है, जहां कई कंपनियों ने पूरी की पूरी टीमें ही समाप्त कर दी हैं।

बिक्री में गिरावट ने बढ़ाई कंपनियों की टेंशन

स्मार्टफोन बाजार की रीढ़ माने जाने वाले एंट्री-लेवल (सस्ते फोन) और कम मार्जिन वाले सेगमेंट की बिक्री में पिछले एक साल में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

'रैंडस्टैड इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दबाव से उबरने के लिए कंपनियों ने पिछले दो तिमाहियों में अपने कॉर्पोरेट और कमर्शियल स्टाफ में 12 से 15 प्रतिशत की भारी कटौती की है। मुख्य रूप से ऑफलाइन मार्केटिंग, फील्ड एक्टिवेशन और रीजनल सेल्स मैनेजमेंट जैसे पदों को खत्म किया जा रहा है, क्योंकि अब ग्राहक ऑफलाइन के बजाय प्रीमियम फोन और ऑनलाइन खरीदारी को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं।

वनप्लस और रियलमी में सबसे बड़ा 'एक्शन'

उद्योग जगत के विशेषज्ञों (Industry Experts) के अनुसार, इस छंटनी का सबसे बड़ा असर दो बड़े ब्रांड्स पर देखा गया है:

वनप्लस (OnePlus): कंपनी ने अपनी 'ऑफलाइन एक्सपेंशन टीम' को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके चलते करीब 60 कर्मचारियों की नौकरी एक झटके में चली गई, जो कुछ महीने पहले तक कंपनी के बड़े विस्तार की योजना पर काम कर रहे थे।

रियलमी (Realme): कंपनी ने कई राज्यों के ऑपरेशंस को सीधे डिस्ट्रीब्यूटर एजेंट्स के हवाले कर दिया है। साथ ही 50 से अधिक एरिया बिजनेस मैनेजर्स को एजेंट्स के पेरोल पर शिफ्ट होने के लिए कह दिया गया है।

शाओमी और ट्रांसियन: इन कंपनियों के फील्ड फोर्स स्टाफ पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है, हालांकि ट्रांसियन ने आधिकारिक तौर पर छंटनी की खबरों से इनकार किया है।

'लीन स्ट्रक्चर': अब कम लोगों से ज्यादा काम कराने का ट्रेंड

लागत कम करने के लिए कंपनियां अब 'लीन स्ट्रक्चर' (Lean Structure) अपना रही हैं। यानी कर्मचारियों की संख्या कम होगी, लेकिन उनसे काम ज्यादा लिया जाएगा।

काम का नया तरीका: अब प्रोडक्ट मार्केटिंग प्रोफेशनल्स को ही ब्रांड कम्युनिकेशन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा रही है। वहीं, रीजनल सेल्स लीड्स को अब एक साथ कई इलाकों के साथ-साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनल्स को अकेले संभालना पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इंडस्ट्री के खत्म होने का संकेत नहीं है, बल्कि बाजार के बदलते स्वरूप के अनुसार खुद को ढालने की एक रणनीति है।

जॉब मार्केट सुस्त: सैलरी हाइक और नई नियुक्तियां घटीं

'टीमलीज' की रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन सेक्टर के जॉब मार्केट का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है:

सैलरी हाइक में कमी: पहले जो कंपनियां टैलेंटेड प्रोफेशनल्स को लुभाने के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक की सैलरी हाइक (Hike) देती थीं, वह अब घटकर महज 15 से 20 प्रतिशत रह गई है।

प्रमोटर नेटवर्क में कटौती: थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ और प्रमोटर नेटवर्क में 5 से 15 प्रतिशत की छंटनी की गई है। कंपनियां अब केवल उन्हीं रिटेल काउंटर्स पर पैसा लगा रही हैं, जहां से बेहतरीन सेल मिल रही है।

क्या भारत में खत्म हो रहा है चाइनीज फोन का क्रेज?

आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स का दबदबा अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। शाओमी, ओप्पो, वनप्लस और रियलमी की बिक्री में पिछले वित्त वर्ष में पहली बार गिरावट देखी गई है।

मुख्य बिंदुबाजार का नया बदलाव
बदली ग्राहकों की पसंदभारतीय उपभोक्ता अब 20,000 रुपये से ऊपर के प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
मार्केट शेयर में गिरावटकाउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, 2023 में चीनी ब्रांड्स की मार्केट वैल्यू हिस्सेदारी 54% थी, जो 2025 तक घटकर महज 48% रह गई है।

 

साफ है कि एंट्री और मिड-रेंज सेगमेंट पर निर्भर रहने वाले चाइनीज ब्रांड्स के लिए भारतीय बाजार की यह नई करवट एक बड़े खतरे की घंटी है।

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