खेती में 'हाई-टेक' क्रांति: 2047 तक 450 मिलियन टन अनाज का लक्ष्य, AI और ब्लॉकचेन बनेंगे रीढ़

'फसल नहीं, पौधे की जड़ है हमारा असली निशाना'—उर्वरक उद्योग में डिजिटल बदलाव समय की मांग।

23 May 2026  |  79

 

शिमला। भारतीय कृषि और उर्वरक क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अनिवार्यता बन चुका है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) के महानिदेशक एस.के. चौधरी ने बुधवार को शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि साल 2047 तक देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाकर 450 मिलियन टन तक पहुंचाना होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित कृषि दक्षता सबसे महत्वपूर्ण हथियार साबित होगी।

 पौधे की जड़ पर ध्यान: उर्वरक उद्योग में बड़े बदलाव की जरूरत

महानिदेशक चौधरी ने उर्वरक उद्योग की पारंपरिक सोच में मौलिक बदलाव (Fundamental Shift) का आह्वान करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही:

"हमारा अंतिम लक्ष्य किसान नहीं, बल्कि पौधे की जड़ होना चाहिए। जब हमारा उद्योग पौधे की जड़ को ध्यान में रखकर काम करेगा—यानी सही समय पर, सही स्थान पर और सही मात्रा में सही पोषक तत्व पहुंचाएगा—तभी सटीक पोषण (Precision Nutrition), सेंसर-आधारित डिलीवरी और विशेष उर्वरक फॉर्मूलेशन जैसे नवाचारों के नए रास्ते खुलेंगे।"

 वैदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम

उन्होंने रेखांकित किया कि वैदिक काल से चले आ रहे गहरे कृषि ज्ञान के कारण भारत आज वैश्विक स्तर पर इस विमर्श का नेतृत्व करने की स्थिति में है। भारत प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) और पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) के ढांचे को अपनाकर दुनिया को नई राह दिखा सकता है।

 ब्लॉकचेन और AI से बदलेगी उर्वरक सेक्टर की सूरत

तकनीक की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर देते हुए महानिदेशक ने दो मुख्य स्तंभों का जिक्र किया:

ब्लॉकचेन तकनीक: यह उर्वरक क्षेत्र के लॉजिस्टिक्स और प्रशासन की पूरी सूरत बदल सकती है। इससे बंदरगाह (Port of entry) से लेकर किसान के खेत तक उर्वरकों की आवाजाही में पारदर्शिता और ट्रेसेबिलिटी (Traceability) सुनिश्चित होगी।

AI और रिमोट सेंसिंग: उत्पादन योजना से लेकर जोखिम प्रबंधन, सप्लाई चेन, रिमोट सेंसिंग, GIS-आधारित सॉइल मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और AI-आधारित परामर्श प्रणालियों के जरिये ऊर्जा दक्षता, नीतिगत अनुपालन और कृषि उत्पादकता में अभूतपूर्व सुधार किया जा सकता है।

 चार दिवसीय कार्यक्रम की मुख्य बातें

इस चार दिवसीय विशेष कार्यक्रम को उर्वरक और कृषि क्षेत्रों में ICT के पूर्ण अनुप्रयोग को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:

मुख्य विषयकृषि में इसका प्रभाव
लॉजिस्टिक्स के लिए ब्लॉकचेनउर्वरक वितरण में पारदर्शिता और कालाबाजारी पर रोक
प्रेडिक्टिव एनालिटिक्समांग और आपूर्ति का सटीक पूर्वानुमान
सेंसर नेटवर्कमिट्टी और फसलों की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी
ब्लू ओशन स्ट्रैटेजी (Blue Ocean Strategy)डिजिटल तकनीक के माध्यम से नए और अछूते बाजारों का निर्माण

 

यह कार्यक्रम न केवल भारतीय कृषि को आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप तैयार करेगा, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत को एक 'एग्री-टेक' लीडर के रूप में भी स्थापित करेगा।

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