अफ्रीका में इबोला का कहर: भारत सरकार ने जारी की सख्त ट्रैवल एडवाइजरी, कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घोषित किया इंटरनेशनल इमरजेंसी; जानलेवा 'बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन' का बढ़ा खतरा, देश के सभी एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी तेज।

24 May 2026  |  58

 

नई दिल्ली: अफ्रीकी देशों में जानलेवा इबोला वायरस के नए स्ट्रेन के तेजी से फैलते प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद इन देशों में रह रहे या वहां की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक सख्त एडवाइजरी (परामर्श) जारी की है। सरकार ने नागरिकों को अगली सूचना तक कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की हर तरह की गैर-जरूरी (अनावश्यक) यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी है।

ग्लोबल इमरजेंसी बना 'बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीका में बिगड़ते हालातों को देखते हुए इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित कर दिया है।

महाद्वीपीय खतरा: 'अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' ने भी कांगो और युगांडा को अपनी चपेट में लेने वाले इबोला के 'बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन' को महाद्वीपीय सुरक्षा के लिए बड़ा आपातकाल माना है।

हाई-रिस्क जोन: कांगो और युगांडा की सीमाओं से सटे होने के कारण दक्षिण सूडान को भी संक्रमण के सबसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

भारतीयों के लिए सरकार की गाइडलाइंस

स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन भारतीयों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं जो पहले से ही इन प्रभावित अफ्रीकी देशों में मौजूद हैं:

स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें।

भीड़भाड़ वाले इलाकों और संभावित संक्रमित क्षेत्रों में जाने से बचें तथा अतिरिक्त सावधानी बरतें।

किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्थानीय चिकित्सा सहायता और भारतीय दूतावास से संपर्क करें।

भारत में एंट्री पॉइंट्स पर सुरक्षा सख्त: थर्मल स्कैनिंग और मॉनिटरिंग के निर्देश

डब्ल्यूएचओ (WHO) की आपातकालीन समिति द्वारा 22 मई को जारी की गई अस्थायी सिफारिशों के बाद भारत ने देश के सभी प्रवेश द्वारों (हवाई अड्डों और बंदरगाहों) पर रोग निगरानी प्रणाली को बेहद मजबूत कर दिया है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित देशों से आने वाले हर उस यात्री की गहन जांच, आकलन और रिपोर्टिंग की जाए, जिसमें अस्पष्ट बुखार या इबोला से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दे रहे हों।

राहत की बात: भारत में अब तक शून्य मामला, पर क्यों खतरनाक है यह वायरस?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक बुन्दिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली इबोला बीमारी का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, इस वायरस को लेकर लापरवाही नहीं बरती जा सकती क्योंकि:

रक्तस्रावी बुखार: यह इबोला वायरस का एक बेहद गंभीर रूप है जो शरीर के अंगों से खून बहने (रक्तस्रावी बुखार) का कारण बनता है। इसमें मृत्यु दर अत्यधिक चिंताजनक है।

कोई इलाज नहीं: सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन को रोकने या इसके इलाज के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन (टीका) या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है

सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के संपर्क में है ताकि देश को इस वैश्विक खतरे से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।

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