दिल्ली में जयशंकर-रुबियो महामंथन: आतंकवाद, ईरान युद्ध और तेल संकट पर रणनीतिक चर्चा, वीजा नियमों पर भारत की दोटूक

'ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता और भारत अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार'— वैश्विक तनाव के बीच भारत-US के कूटनीतिक रिश्तों को मिली नई धार।

24 May 2026  |  56

 

नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुई इस बैठक के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। इस महामंथन के दौरान ईरान युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट संकट, रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक ऊर्जा संकट, आतंकवाद, ट्रेड डील और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री जयशंकर ने विश्वास जताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत और परिपक्व हो रहे हैं। बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्वी एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थितियों की भी समीक्षा की गई।

1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का रुख स्पष्ट

बैठक के दौरान वैश्विक तेल संकट का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा:

"भारत सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है। इसके लिए ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता और किफायती (सस्ती) कीमत भारत के लिए बेहद जरूरी है।"

इसी संदर्भ में अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ तेल सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने और ऊर्जा संकट से निपटने के उपायों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही, दोनों देशों के बीच सिविल न्यूक्लियर सहयोग को आगे बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते द्विपक्षीय तालमेल पर संतोष व्यक्त किया गया।

जल्द भारत आएगी अमेरिकी टीम, अंतिम दौर में 'ट्रेड डील'

आर्थिक मोर्चे पर भी इस बैठक से बड़ी और सकारात्मक खबर निकलकर सामने आई है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है।

इस समझौते के अंतिम मसौदे (Final Draft) को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी अधिकारियों की एक विशेष टीम जल्द ही भारत का दौरा करेगी। जयशंकर के मुताबिक, यह व्यापारिक समझौता दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएगा।

"अहम जलमार्गों को कोई बंधक नहीं बना सकता" — मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी बड़े वैश्विक और सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों की सोच एक समान है।

होर्मुज स्ट्रेट और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए रुबियो ने सख्त लहजे में कहा:

"दुनिया के बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील जलमार्गों को कोई भी देश या संगठन बंधक नहीं बना सकता। होर्मुज स्ट्रेट का सुरक्षित रहना भारत और अमेरिका, दोनों के आर्थिक व रणनीतिक हितों से सीधा जुड़ा हुआ है।"

इसके अलावा, दोनों नेताओं ने आतंकवाद को एक साझा चुनौती बताते हुए इसके खिलाफ मिलकर लड़ने, ड्रग तस्करी (मादक पदार्थों की तस्करी) और अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स पर नकेल कसने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

वीजा और अवैध प्रवासियों पर गंभीर बातचीत

कूटनीतिक वार्ता के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका जाने वाले भारतीयों के हितों की पैरवी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भारतीय नागरिक कानूनी प्रक्रिया का पालन कर वीजा लेकर अमेरिका जाते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करता है, तो भारत ऐसी गतिविधियों को रोकने में अमेरिका का पूरा सहयोग करेगा।

अमेरिका की सफाई: इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिका के आंतरिक संकट का हवाला देते हुए कहा कि इस समय अमेरिका में गंभीर माइग्रेशन संकट है, जहाँ करीब दो करोड़ लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वाशिंगटन की नई सख्त माइग्रेशन पॉलिसी विशेष रूप से भारत के लोगों को टारगेट करके नहीं बनाई गई है। सिस्टम में हो रहे इस सुधार के कारण भले ही कुछ भारतीय अस्थाई रूप से प्रभावित हो रहे हों, लेकिन भविष्य में सुधरा हुआ सिस्टम वैध भारतीयों के लिए और अधिक सुविधाजनक साबित होगा।

अन्य खबरें