SHRM Report 2026: भारत में AI से बैक ऑफिस और डेटा नौकरियों पर मंडराया संकट, 45% कंपनियां स्किल की कमी से जूझ रहीं

अगले 3 साल नौकरी बाजार के लिए बेहद नाजुक; भारत में सिर्फ 2.3% वर्कफोर्स के पास ही औपचारिक ट्रेनिंग, प्रैक्टिकल लर्निंग पर निवेश महज 3 प्रतिशत।

24 May 2026  |  51

 

 

नई दिल्ली: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन की रफ्तार जितनी तेजी से बढ़ रही है, देश का नौकरी बाजार और कंपनियां उस बदलाव के लिए उतनी तैयार नजर नहीं आ रही हैं। हाल ही में जारी SHRM इंडिया स्किल इंटेलिजेंस रिपोर्ट 2026 ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले तीन सालों में बैक ऑफिस, डेटा एंट्री और कस्टमर सर्विस जैसे सेक्टर्स की नौकरियों पर एआई का सबसे बड़ा और सीधा असर पड़ने वाला है।

चिंता की बात यह है कि देश की करीब 45 प्रतिशत कंपनियां इस समय एआई और जरूरी डिजिटल स्किल्स की भारी कमी से जूझ रही हैं। एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि अगर समय रहते कर्मचारियों के स्किल डेवलपमेंट (हुनर विकास) पर काम नहीं किया गया, तो लाखों युवाओं के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।

किन सेक्टर्स पर मंडरा रहा है सबसे ज्यादा खतरा?

SHRM की रिपोर्ट के लिए देश के 198 से ज्यादा सीनियर एचआर (HR) और लर्निंग लीडर्स से बातचीत की गई। इसके आधार पर अगले तीन वर्षों में निम्नलिखित रोल्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ने का अनुमान है:

बैक ऑफिस रोल्स: करीब 28 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

डेटा और रिपोर्टिंग जॉब्स: लगभग 24 प्रतिशत भूमिकाओं पर एआई का असर दिखेगा।

कस्टमर सर्विस: करीब 21 प्रतिशत नौकरियों में एआई-आधारित ऑटोमेशन (स्वचालन) तेजी से बढ़ेगा।

इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए SHRM के प्रेसिडेंट जॉनी सी. टेलर जूनियर ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे युवा वर्कफोर्स (कार्यबल) है। ऐसे में चुनौतियों के बावजूद देश के पास भविष्य की 'डिजिटल टैलेंट कैपिटल' बनने का एक शानदार मौका भी मौजूद है।

वैश्विक स्तर पर बेहद कमजोर है भारत का ट्रेनिंग मॉडल

रिपोर्ट ने भारत में कर्मचारियों को दी जाने वाली औपचारिक (Formal) ट्रेनिंग के बेहद निराशाजनक आंकड़ों को भी उजागर किया है। दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में भारत इस मामले में कोसों पीछे है:

देशऔपचारिक रूप से ट्रेन्डिंग वर्कफोर्स (%)
दक्षिण कोरिया96%
जर्मनी75%
यूनाइटेड किंगडम (UK)68%
भारत2.3%

इसके अलावा, भारतीय कंपनियां बजट का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 60 प्रतिशत) पारंपरिक डिजिटल कोर्स और क्लासरूम ट्रेनिंग पर खर्च कर रही हैं, जबकि असल जरूरत यानी प्रैक्टिकल और हैंड्स-ऑन लर्निंग पर सिर्फ 3 प्रतिशत निवेश किया जा रहा है। केवल 34 प्रतिशत कंपनियां ही अपने स्किलिंग प्रोग्राम के नतीजों को सही तरीके से मापती हैं।

एआई अपनाने में तकनीक नहीं, लीडरशिप और ROI बड़ी बाधा

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एआई अपनाने की धीमी रफ्तार के पीछे तकनीकी कमियां नहीं, बल्कि नेतृत्व (Leadership) और निवेश पर रिटर्न (ROI) की चिंताएं हैं।

लगभग 54 प्रतिशत कंपनियों ने स्वीकार किया कि उनके यहां एआई निवेश को लेकर गंभीरता का स्तर अभी भी मध्यम या कम है। वहीं, 44 प्रतिशत कंपनियां लीडरशिप और आरओआई को सबसे बड़ा रोड़ा मानती हैं। इसके अतिरिक्त, 41 प्रतिशत कंपनियों के पास सस्टेनेबिलिटी (ESG और ग्रीन स्किल्स) से जुड़ी स्किल्स की भी भारी कमी है।

निष्कर्ष: SHRM APAC और MENA के सीईओ अचल खन्ना के अनुसार, भारत इस समय वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन (कार्यबल परिवर्तन) के एक बेहद ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। आने वाला भविष्य केवल उन्हीं कंपनियों और कर्मचारियों का होगा जो समय की मांग को भांपते हुए खुद को नई स्किल्स के साथ अपग्रेड कर पाएंगे।

अन्य खबरें