जल जीवन मिशन में बड़ा खेल: वसुंधरा राजे के क्षेत्र में कागजों पर 'हर घर जल', जमीन पर पानी की एक बूंद को तरस रहे ग्रामीण

सरकारी रिकॉर्ड में 178 में से 173 परिवारों को मिला कनेक्शन; हकीकत में 1 किमी दूर कुएं से पानी लाने को मजबूर हैं महिलाएं, टूटी पाइपलाइनों ने खोली दावों की पोल।

24 May 2026  |  104

 

 

झालावाड़/रायपुर: राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना के क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कागजों पर तो 'हर घर नल से जल' पहुंचाने का शत-प्रतिशत दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट और बेहद चिंताजनक है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र की रायपुर तहसील का पालखंदा गांव है, जहां ग्रामीण आज के आधुनिक दौर में भी पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं।

कागजी आंकड़ों की बाजीगरी बनाम जमीनी हकीकत

जल संसाधन विभाग के सरकारी रिकॉर्ड और रिपोर्ट पर नजर डालें, तो पालखंदा गांव को 'हर घर जल' योजना के तहत पूरी तरह कवर्ड घोषित किया जा चुका है।

सरकारी दावा: रिकॉर्ड के अनुसार, गांव के कुल 178 परिवारों में से 173 को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं और वहां नियमित रूप से जलापूर्ति (वाटर सप्लाई) हो रही है।

जमीनी सच्चाई: गांव का दौरा करने पर प्रशासनिक दावों की पोल खुल जाती है। कई घरों के बाहर पाइप लाइनें तो बिछी हैं, लेकिन नलों में आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है।

गांव की महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि वर्ष 2023 से लेकर अब तक (पिछले तीन सालों में) उन्होंने अपने घरों के नलों में पानी का चेहरा तक नहीं देखा है। गांव की गृहणियां आज भी भीषण गर्मी के बीच करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर कुएं से पीने का पानी ढोने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनका वर्षों पुराना और गहरा नाता है, लेकिन इसके बावजूद उनके गांव की यह बुनियादी समस्या जस की तस बनी हुई है।

घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पालखंदा गांव की गलियों में जगह-जगह निम्न गुणवत्ता (घटिया दर्जे) की प्लास्टिक पाइप लाइनें बिछी हुई देखी जा सकती हैं, जो कई जगहों से पूरी तरह टूट चुकी हैं। हालत यह है कि कई घरों में नलों पर टोटियां (टैप) तक नहीं लगाई गई हैं।

ग्रामीणों का आरोप: ग्रामीणों ने सीधे तौर पर ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के बीच तगड़ी मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ठेकेदारों ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर औपचारिकता पूरी की और बिना वास्तविक जलापूर्ति शुरू किए ही अधिकारियों से 'कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र' (Completion Certificate) हासिल कर सारा भुगतान उठा लिया।

प्रशासन का डैमेज कंट्रोल: टैंकरों का सहारा

इस गंभीर मामले पर चौतरफा घिरने के बाद स्थानीय प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है:

उपखंड अधिकारी (SDM): उन्होंने स्वीकार किया कि विभागीय रिपोर्ट में सप्लाई चालू दिखाई गई है। हालांकि, ग्रामीणों के आक्रोश और संकट को देखते हुए फिलहाल प्रशासन दो टैंकरों के जरिए गांव में अस्थाई रूप से पानी उपलब्ध करवाएगा।

अधिशासी अभियंता (गौतम): उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए नया तर्क दिया कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान मुख्य पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे जल्द दुरुस्त कर एक सप्ताह के भीतर गांव में सुचारू पानी सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।

पहले भी गाज गिर चुकी है अफसरों पर

यह पहला मौका नहीं है जब इस क्षेत्र में जल जीवन मिशन की कमियां उजागर हुई हैं। इससे पहले अप्रैल 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्वयं क्षेत्र के दौरे के दौरान योजना में बड़े पैमाने पर चल रही गड़बड़ियों और लेटलतीफी पर अपनी सख्त नाराजगी जताई थी। इसके तत्काल बाद जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार झा को लापरवाही और खराब मॉनिटरिंग के आरोपों के चलते एपीओ (Action Pending Order) कर दिया गया था। इसके बावजूद, निचले स्तर पर सुधार न होना प्रशासनिक ढिलाई को साफ बयां करता है।

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