उदयपुर/बांसवाड़ा। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भारतीय इतिहास और स्कूली पाठ्यक्रमों को लेकर एक बड़ा और वैचारिक बयान दिया है। बांसवाड़ा दौरे पर पहुंचे देवनानी ने कहा कि स्कूलों में 'अकबर महान' पढ़ाए जाने से उन्हें हमेशा गहरी पीड़ा होती थी। उन्होंने साफ किया कि जो आक्रांता इस देश पर हमला करने आए, उन्हें महान बताना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यही वजह थी कि जब वे शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 'अकबर महान' की जगह 'प्रताप महान' (महाराणा प्रताप) को शामिल करवाया।
इतिहास की किताबों पर उठाए सवाल: 'वास्कोडिगामा ने भारत को नहीं खोजा'
गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ' का शुभारंभ करने पहुंचे देवनानी ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने प्रचलित इतिहास की अवधारणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा:
इतिहास के साथ अन्याय: यह पढ़ाया जाना कि 'भारत की खोज वास्कोडिगामा ने की थी', हमारे गौरवशाली इतिहास के साथ सरासर अन्याय है।
सनातन की प्राचीनता: भारत हजारों साल पुरानी सनातन परंपरा और समृद्ध सभ्यता वाला देश है।
दुनिया को राह दिखाई: देवनानी ने गर्व से कहा, "हमने विश्व को खोजा है, हमें किसी ने नहीं खोजा।"
बांसवाड़ा के विकास और मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं का जिक्र
विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में कुलपति केशव ठाकुर सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने क्षेत्र के बदलते स्वरूप की सराहना की:
बदलाव की तारीफ: उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बांसवाड़ा जिले में विकास के बड़े कार्य हुए हैं और इसमें बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।
सीएम की प्राथमिकता: उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्राथमिकताओं में भी इस जनजातीय क्षेत्र का समग्र विकास शीर्ष पर शामिल है।
शक्तिपीठ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में की विशेष पूजा
कड़े सुरक्षा घेरे में दर्शन: विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यक्रम के समापन के बाद, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी प्रसिद्ध शक्तिपीठ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर पहुंचे। वहाँ उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए विशेष दर्शन-पूजन किए। उनके इस वीआईपी (VIP) दौरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए थे।
खबर का विश्लेषण
वासुदेव देवनानी का यह बयान एक बार फिर देश में 'इतिहास के भारतीयकरण' की बहस को तेज कर सकता है। शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए बदलावों को उन्होंने अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और राष्ट्र गौरव से जोड़कर पेश किया है।