दुबई/वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा जगत को हिलाकर रख देने वाली एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स' (FT) की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की कुख्यात 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ही एक कंपनी का इस्तेमाल मोहरे के रूप में करके चीन से बेहद उन्नत सैन्य सैटेलाइट उपकरण खरीदे।
इस मामले का सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाला पहलू यह है कि यूएई की जिस कंपनी ने अनजाने या मिलीभगत से ईरान की सैन्य विंग को यह घातक तकनीक पहुंचाई, बाद में ईरान की उसी सैन्य विंग ने यूएई की धरती पर 2,800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले किए।
शंघाई से दुबई होते हुए ईरान: ऐसे बुना गया तस्करी का जाल
दस्तावेजों और शिपिंग रिकॉर्ड्स के विश्लेषण से पता चला है कि वर्ष 2025 के अंत में IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने इस पूरी गुप्त सैन्य खरीद को अंजाम दिया:
यूएई की मुखौटा कंपनी: इस सौदे के लिए यूएई के रस अल खैमाह अमीरात में स्थित 'टेलीसन' (Telesun) नाम की कंपनी का इस्तेमाल किया गया। इसी कंपनी ने ईरान की तरफ से चीनी उपकरण खरीदे।
1.8 टन का शिपिंग कंसाइनमेंट: चीन के शंघाई शहर से लगभग 1.8 टन वजनी सैन्य-ग्रेड सैटेलाइट एंटीना और अन्य उपकरणों को 6 बड़े बॉक्स में पैक किया गया। सीमा शुल्क (Custom) रिकॉर्ड में इसे केवल 'एंटीना और एक्सेसरीज' घोषित किया गया था।
रास्ते में लोकेशन की हेराफेरी: यह सामान पहले चीनी जहाज के जरिए दुबई के जेबेल अली पोर्ट पहुंचा। वहां से ईरान के संदिग्ध मालवाहक जहाज 'रामा III' (Rama III) ने इसे उठाया। पकड़े जाने के डर से इस जहाज ने फर्जी GPS सिग्नल भेजे ताकि ट्रैकिंग सिस्टम को गुमराह किया जा सके, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने पोल खोल दी कि यह जहाज 29 नवंबर को ईरान के शाहिद रजाई पोर्ट पर सामान उतार रहा था।
प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरानी कंपनियों का चक्रव्यूह
यह पूरा खुफिया नेटवर्क पश्चिमी देशों और अमेरिका के प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाने के लिए तैयार किया गया था:
प्रतिबंधित ग्रुप के लिए काम: यूएई की कंपनी ने यह सामान ईरान की टेलीकॉम कंपनी 'एरतेबातात फरागोस्टर किश' (EFK) के लिए खरीदा था। EFK असल में ईरान के 'समान इंडस्ट्रियल ग्रुप' के लिए काम करती है। 'समान ग्रुप' पर अमेरिका ने 2023 में ही प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि यह सीधे तौर पर IRGC के मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रोग्राम को चलाता है।
ड्रैगन-ईरान नेक्सस पर अमेरिका का कड़ा एक्शन
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं है। चीन और ईरान का यह गुप्त सैन्य गठजोड़ लगातार वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है:
'द अर्थ आई' पर प्रतिबंध: इससे पिछले महीने भी यह खुलासा हुआ था कि IRGC ने चीन की कंपनी 'द अर्थ आई' (The Earth Eye) से एक हाई-टेक सैटेलाइट हासिल किया था। इस सैटेलाइट का इस्तेमाल खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर की जासूसी के लिए किया जा रहा था।
अमेरिका की दो टूक चेतावनी: इस खुलासे के तुरंत बाद अमेरिका ने चीनी कंपनी 'द अर्थ आई' पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। वॉशिंगटन ने साफ कर दिया है कि यदि चीन की कंपनियां ईरान की इस सैन्य आक्रामकता और ड्रोन प्रोग्राम में मदद करना बंद नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ वैश्विक स्तर पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
मध्य पूर्व के समीकरणों पर असर
इस खुलासे के बाद खाड़ी देशों, विशेषकर यूएई के सुरक्षा महकमे में खलबली मच गई है। अपनी ही जमीन की कंपनियों का इस्तेमाल कर खुद पर हमला करने वाले हथियार विकसित करने की ईरान की इस कूटनीति ने मिडिल ईस्ट के तनाव को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।