धान की नर्सरी (बिचड़ा) डालते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, बंपर पैदावार के लिए अपनाएं 'बीज और पानी' का यह सटीक फॉर्मूला

मई के आखिरी हफ्ते से शुरू हो रहा है सही समय; बासमती और हाइब्रिड किस्मों के अनुसार जानें बीज की सही मात्रा और सिंचाई का सही तरीका।

25 May 2026  |  58

 

कृषि एवं ग्रामीण डेस्क, नई दिल्ली। खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही किसान भाइयों के लिए सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण काम होता है—धान की नर्सरी (बिचड़ा) तैयार करना। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धान की नर्सरी मजबूत, घनी और पूरी तरह स्वस्थ होगी, तभी आगे चलकर मुख्य खेत में पौधों का विकास अच्छा होगा और धान की बंपर पैदावार मिलेगी। हालांकि, बहुत से किसान भाई शुरुआत में ही कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और पूरी फसल पर इसका बुरा असर पड़ता है।

अगर आप भी इस सीजन में धान की शानदार पैदावार चाहते हैं, तो नर्सरी डालते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

1. बिल्कुल सही समय पर डालें नर्सरी

धान की नर्सरी डालने के लिए समय का चुनाव सबसे अहम है। आम तौर पर मई के आखिरी हफ्ते से लेकर जून के मध्य तक का समय बिचड़ा तैयार करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान मौसम का तापमान बीजों के अंकुरण (Germination) के लिए एकदम अनुकूल होता है, जिससे बीज तेजी से और स्वस्थ तरीके से बाहर आते हैं।

2. किस्मों के हिसाब से बीजों का 'सही गणित'

अक्सर किसान भाई क्यारियों में जरूरत से ज्यादा बीज डाल देते हैं, जिससे पौधे कमजोर और पतले हो जाते हैं। अलग-अलग किस्मों के अनुसार बीजों की सही मात्रा इस प्रकार है:

बासमती और सुगंधित किस्में: यदि आप बासमती जैसी बारीक या सुगंधित किस्मों की खेती कर रहे हैं, तो एक एकड़ खेत की रोपाई के लिए आपको नर्सरी में लगभग 15 से 20 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होगी।

हाइब्रिड किस्में: यदि आपका इरादा ज्यादा पैदावार देने वाली हाइब्रिड किस्मों को लगाने का है, तो बीजों की मात्रा काफी कम हो जाती है। हाइब्रिड धान के लिए प्रति एकड़ केवल 5 से 6 किलोग्राम बीज ही पर्याप्त होते हैं।

3. 'सीड ट्रीटमेंट' (बीज उपचार) को न करें नजरअंदाज

नर्सरी में बीज बोने से पहले उनका सही तरीके से उपचार (Seed Treatment) करना बेहद जरूरी है। इसके लिए बीजों को किसी अच्छे फफूंदनाशक (Fungicide) या फिर नमक के पानी के घोल में थोड़ी देर के लिए भिगोकर रखें। ऐसा करने से भविष्य में फसल को लगने वाली कई खतरनाक फंगल और जनित बीमारियों का खतरा शुरुआती दौर में ही टल जाता है और पौधे निरोगी बनते हैं।

4. पानी का सही मैनेजमेंट (सिंचाई की तकनीक)

नर्सरी के बेड (क्यारियों) में पानी का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:

शुरुआती दिनों में क्यारियों में केवल नमी बनी रहनी चाहिए, पानी का जमाव बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

तेज धूप से पौधों को बचाने और नमी को बरकरार रखने के लिए सुबह और शाम के वक्त हल्की सिंचाई करें या पानी का हल्का छिड़काव (स्प्रे) करें।

21 से 25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार

यदि आप इस वैज्ञानिक और सटीक फॉर्मूले को अपनाते हैं, तो मात्र 21 से 25 दिनों के भीतर आपकी नर्सरी मुख्य खेत में रोपाई (Transplantation) के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी। सही मात्रा में बीज और पानी के इस सटीक तालमेल से न सिर्फ आपकी लागत कम होगी, बल्कि आपकी फसल की बुनियाद भी बेहद मजबूत होगी।

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