थूथुकुडी (तमिलनाडु) महिला और बाल सुरक्षा के इतिहास में तमिलनाडु की एक अदालत ने न्याय की एक ऐसी नज़ीर पेश की है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। थूथुकुडी (तूतीकोरिन) जिले की पॉक्सो (POCSO) विशेष अदालत ने एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महज 75 दिनों की त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) के भीतर आरोपी धर्मा मुनीश्वरन को 'दोहरी मौत की सजा' (Double Death Penalty) सुनाई है।
इस संवेदनशील मामले में पुलिस की वैज्ञानिक जांच, फोरेंसिक साक्ष्य और न्यायपालिका की तत्परता ने मिलकर महज़ तीन महीने के भीतर पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाया है।
विंडमिल के कैमरे से खुला खौफनाक राज
यह जघन्य वारदात पिछले मार्च महीने में थूथुकुडी जिले के विलाथिकुलम के एक सुदूर गांव में संभलने आई थी, जब 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली पीड़िता शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। घात लगाकर बैठे आरोपी ने रास्ते में उसे रोका, दरिंदगी की और फिर पहचान छुपाने के लिए उसकी हत्या कर दी।
शुरुआती दौर में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था, लेकिन जांच टीम ने हार नहीं मानी। पुलिस ने गांव और शहर को जोड़ने वाले रास्तों पर लगे कैमरों की लगभग 1000 घंटे की CCTV फुटेज खंगाली। आखिरकार, एक विंडमिल (पवन चक्की) परिसर में लगे कैमरे ने इस अंधे कत्ल का राज खोल दिया। फुटेज में आरोपी वारदात से कुछ घंटे पहले संदिग्ध रूप से गांव में दाखिल होता और अगली सुबह बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया।
वैज्ञानिक साक्ष्य और 21 दिन में चार्जशीट
पुलिस ने सीसीटीवी में दिखे कपड़ों और शारीरिक बनावट के आधार पर आरोपी धर्मा मुनीश्वरन को दबोच लिया। इसके बाद वैज्ञानिक जांच ने आरोपी के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए:
खून के धब्बे: आरोपी की शर्ट पर मिले खून के निशान पीड़िता के ब्लड ग्रुप से मैच कर गए।
DNA और फोरेंसिक: डीएनए टेस्ट ने अपराध स्थल पर आरोपी की मौजूदगी की पुख्ता पुष्टि की।
सुनियोजित साजिश: जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से ही इलाके की रेकी कर रहा था और पूरी योजना के साथ आया था।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 21 दिनों के भीतर अदालत में पुख्ता चार्जशीट दाखिल कर दी।
71 गवाह और 75 दिन में 'दोहरी फांसी'
अदालत में यह मामला बेहद तेजी से चला। इस दौरान कुल 71 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। फोरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए जांच और अभेद्य सीसीटीवी फुटेज को अचूक सबूत मानते हुए माननीय जज ने आरोपी को समाज के लिए कलंक माना और उसे दोहरी मौत की सजा सुनाई।
"यह फैसला स्वागत योग्य है" — मुख्यमंत्री
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि घिनौनी वारदात के तीन महीने के भीतर आया यह फैसला कानून व्यवस्था पर जनता का विश्वास मजबूत करता है। यह त्वरित न्याय महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के संकल्पों को और गति देगा।
यह फैसला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि पुलिस की आधुनिक जांच और अदालत की इच्छाशक्ति एक साथ मिल जाए, तो अपराधियों का काल कोठरी तक पहुंचना तय है।