कावेरी जल विवाद पर आर-पार: तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, मेकेदातु बांध प्रस्ताव खारिज करने की मांग

कर्नाटक के भूमि पूजन के फैसले पर तमिलनाडु सरकार की तीखी आपत्ति; सीएम विजय बोले- 'निचले तटीय राज्यों की सहमति के बिना बांध बनाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन'।

26 May 2026  |  58

 

चेन्नई। दशकों पुराने कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक बार फिर सियासी और कानूनी तकरार तेज हो गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अत्यंत महत्वपूर्ण पत्र लिखकर कर्नाटक सरकार के मेकेदातु (Mekedatu) बांध निर्माण के प्रस्ताव को तुरंत और पूरी तरह से खारिज करने का आग्रह किया है। यह कदम तब उठाया गया है जब कर्नाटक सरकार ने रामनगर जिले के कनकपुरा के पास मेकेदातु में परियोजना के लिए भूमि पूजन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस गंभीर विषय पर केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विजय जल्द ही दिल्ली का दौरा भी कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का सीधा उल्लंघन

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने साफ तौर पर कहा कि कर्नाटक का यह कदम साल 2018 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना है। उन्होंने तर्क दिया कि मेकेदातु बांध उन परियोजनाओं की सूची में शामिल ही नहीं है जिन्हें कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) ने अपनी मंजूरी दी थी और जिसे बाद में देश की शीर्ष अदालत ने भी सही ठहराया था।

निचले राज्यों के हक पर डाका: सीएम विजय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने अंतरराज्यीय नदी नियमों का हवाला देते हुए पत्र में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है:

"कावेरी नदी के ऊपरी तट पर स्थित राज्यों (जैसे कर्नाटक) को निचले तट वाले राज्यों (तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी) की लिखित सहमति के बिना कोई भी नया बांध, जलाशय या ढांचा बनाने का कतई अधिकार नहीं है। कावेरी बेसिन पहले से ही पानी की भारी कमी वाला क्षेत्र है, जहाँ उपलब्ध पानी का 50 प्रतिशत हिस्सा संबंधित राज्यों को पहले ही आवंटित किया जा चुका है। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त जल भंडारण की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।"

संकट में आएंगे लाखों किसान, केंद्र से तुरंत दखल की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि यदि कर्नाटक इस विवादित जलाशय के प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है, तो यह न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन माना जाएगा। इससे तमिलनाडु के लाखों किसानों और आम जनता के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

तमिलनाडु सरकार ने उम्मीद जताई है कि संघवाद की भावना को बनाए रखने और अंतरराज्यीय तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र सरकार इस मामले में तुरंत और प्रभावी हस्तक्षेप करेगी। मेकेदातु परियोजना को लेकर दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच फिलहाल सीमा पर राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव चरम पर है।

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