AI Warning: एंथ्रोपिक के को-फाउंडर क्रिस ओलाह की चेतावनी— सिर्फ बिग टेक के भरोसे नहीं छोड़ सकते AI का भविष्य, जा सकती हैं लाखों नौकरियां

वेटिकन से उठी मानवता की आवाज; पोप लियो और टेक एक्सपर्ट्स बोले— कॉरपोरेट मुनाफे से नहीं, नैतिक सोच से तय हो एआई की दिशा!

26 May 2026  |  59

 

 

वेटिकन सिटी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी से बढ़ती रफ्तार और इसके भविष्य को लेकर दुनिया भर में चिंताएं गहराने लगी हैं। एआई क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के को-फाउंडर क्रिस ओलाह ने एक बड़े वैश्विक मंच से चेतावनी दी है कि एआई का नियंत्रण सिर्फ चुनिंदा 'बिग टेक' कंपनियों (जैसे ऐपल, अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा) के हाथों में होना पूरी मानवता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वेटिकन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि एआई से जुड़े बड़े फैसलों में सरकारों, धार्मिक नेताओं और आम जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है।

क्यों खतरनाक है बिग टेक का एकाधिकार?

क्रिस ओलाह ने पोप लियो XIV की पहली एनसाइक्लिकल (पोप का आधिकारिक पत्र) के विमोचन के अवसर पर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने स्वीकार किया कि भले ही OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां नई तकनीकों का विकास कर रही हैं, लेकिन उन पर हमेशा बिजनेस, वैश्विक राजनीति और बाजार की प्रतियोगिता का भारी दबाव रहता है।

होड़ में कमजोर पड़ रहे सही फैसले:

ओलाह के मुताबिक, एआई की इस अंधी रेस में आगे निकलने की होड़ कई बार सही और नैतिक फैसलों को कमजोर कर देती है। इसलिए, सिर्फ कंपनियों के भरोसे इस बेकाबू होती तकनीक को नहीं छोड़ा जा सकता। इसके सुरक्षित और मानवीय इस्तेमाल के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त और स्वतंत्र निगरानी प्रणाली की जरूरत है।

इतिहास का सबसे बड़ा सामाजिक बदलाव: नौकरियों पर महा-संकट

भाषण के दौरान ओलाह ने एआई के कारण रोजगार के बाजार पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी।

लाखों की बेरोजगारी का डर: उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई इंसानी कामकाज के तरीकों को पूरी तरह बदल देगा। यह कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं, बल्कि इतिहास के सबसे बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलावों में से एक होगा, जिससे लाखों लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

नैतिक जिम्मेदारी की कमी: ओलाह ने चिंता जताई कि वर्तमान में दुनिया के पास ऐसा कोई मजबूत आर्थिक ढांचा या सिस्टम नहीं है, जो एआई से होने वाली अकूत कमाई या फायदों को आम लोगों में बराबरी से बांट सके। फिलहाल एआई का विकास कुछ अमीर देशों और कंपनियों तक ही सिमट कर रह गया है।

पोप लियो XIV ने जारी किया डॉक्यूमेंट "Magnifica Humanitas"

इस कार्यक्रम में ईसाई धर्मगुरु पोप लियो XIV ने भी एआई की असीमित शक्तियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने नए शिक्षण दस्तावेज “Magnifica Humanitas” में कहा कि दुनिया एआई सिस्टम को अपनाने में जितनी जल्दबाजी दिखा रही है, इसके इंसानी समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने विश्वभर की सरकारों से एआई पर सख्त 'इंसानी निगरानी' (Human Oversight) रखने की पुरजोर अपील की।

रिसर्चर्स के लिए भी अबूझ पहेली बना AI:

क्रिस ओलाह ने एक और चौंकाने वाला पहलू सामने रखते हुए कहा कि आज के एडवांस एआई मॉडल्स इतने जटिल और विशाल हो चुके हैं कि खुद उन्हें बनाने वाले रिसर्चर्स भी उनके व्यवहार को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहे हैं। कई बार एआई का व्यवहार इंसानी सोच जैसा रहस्यमयी दिखाई देने लगा है, जो भविष्य के लिए नए खतरे पैदा कर रहा है।

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